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यहां बच्चे ही एक-दूसरे से कहते हैं: स्कूल चलो

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राजस्थान के आदिवासी क्षेत्रों में जागरूकता के अभाव में जहां स्कूल बच्चों के अभाव में खाली पड़े रहते हैं, वहीं बांसवाड़ा में एक ऐसा स्कूल है, जो बच्चों से आबाद रहता है। यहां माता-पिता या बड़े बुजुर्ग नहीं, बल्कि खुद बच्चे एक-दूसरे को स्कूल चलने के लिए तैयार करते हैं।
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शिक्षकों ने भी इस स्कूल में आनेवाले बच्चों की संख्या बनाए रखने और इनकी संख्या बढ़ाने के लिए अभिनव पहल की है।

शिक्षकों ने स्कूल में आ रहे बच्चों की अलग-अलग टोलियां बनाई हैं, जो आस-पास के गांवों में जाकर उन घरों के बाहर स्कूल चलो के नारे लगाते हैं, जिनके बच्चे पढऩे के लिए स्कूल नहीं जाते। स्कूल प्रबंधन ने भी सभी बच्चों को हनुमान चालीसा देता है, जिसके मुख पृष्ठ पर बच्चों ने भविष्य में डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक आदि बनने का अपना लक्ष्य अंकित कर रखा है।

बच्चों को स्कूल से जोड़े रखने की ये अनोखी पहल जारी है बांसवाड़ा के आदिवासी बहुल गढ़ी उपखंड के कलासुआ गांव की लोहारियापाड़ा बस्ती के राजकीय प्राथमिक विद्यालय में।
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टोली ले आती हैं बच्चों को स्कूल

छितराई हुई आबादी वाले इस इलाके में स्कूल के कुल 76 बच्चों में हैं। विद्यालय के शिक्षक भरत भावसार, रमेश व्यास और सविता रावल का स्कूल पहुंचने के साथ सबसे पहला काम ही यही होता है कि कौन बच्चा स्कूल नहीं आया और क्यों नहीं आया?

यहां शिक्षक और विद्यार्थी मिलकर इनमें से अधिकांश की उपस्थिति सुनिश्चित करते हैं। जो बच्चा स्कूल नहीं आया उसके घर पहुंच बच्चों की टोली स्कूल चलो के नारे लगाती है। टोली के इन नारों से स्कूल नहीं आने वाले बच्चे व स्कूल में अनुपस्थित रहनेवाले बच्चे स्कूल चलने के लिए उत्साहित हो जाते हैं।

यही नहीं, टोली बच्चों से स्कूल नहीं आने का कारण भी पूछती है और यदि खास वजह नहीं हुई, तो बच्चों को साथ ही स्कूल ले आती है। यहां तक की कोई बच्चा नहाकर नहीं आए, तो उसे नहलाने की व्यवस्था भी स्कूल में की जाती है। हालांकि स्कूल को आवश्यकता है कि बिजली व पानी के कनेक्शन के साथ चार दीवारी का निर्माण हो।
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स्कूल पहुंचते ही हनुमान चालीसा का पाठ

स्कूल पहुंच कर बच्चे को उसके भविष्य का लक्ष्य तय कराया जाता है, वो भी हनुमान चालीसा के पाठ के साथ। इस पहल के चलते ही इस स्कूल की शिक्षा विभाग ने सराहना की है और स्कूल के कई बच्चों का उदयपुर, जवाहर नवोदय विद्यालयों में चयन भी हुआ है।

संस्था प्रधान भरत भावसार के अनुसार विद्यालय से प्रारंभिक शिक्षा पूर्ण करने के बाद भी हम बच्चों से सतत संपर्क बनाए रखते हैं। प्रत्येक बच्चे की केस स्टडी बनाई है।

विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष शंकरलाल कलासुआ ने बताया कि इस स्कूल में बच्चों का भविष्य संवर रहा है। इसका नतीजा है कि यहां के बच्चे उच्च शिक्षण संस्थाओं में परीक्षा उत्तीर्ण कर नि:शुल्क शिक्षा ले रहे हैं।
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