आरएलपी नेता और खींवसर विधायक हनुमान बेनीवाल की सुरक्षा अचानक बढ़ाए जाने को लेकर सियासत का बाजार गरम है। राजनीतिक गलियारों में इसके मायने ढूंढे जा रहे हैं। लोकसभा चुनाव से पहले क्या भाजपा राजस्थान में कोई बड़ा गठबंधन करने जा रही है। पार्टी प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी ने शनिवार को दिए एक बयान से इसे लेकर सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
जब सीपी जोशी से पूछा गया कि कई नेताओं की सुरक्षा बढ़ा दी गई है क्या लोकसभा चुनाव से पहले दूसरी पार्टी के नेता भाजपा में शामिल होना चाहते हैं। इस पर उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले भी कई नेता, ब्यूरोक्रेट भाजपा में शामिल होना चाहते थे और अब भी कई लोग हमारे संपर्क में है।
गौरतलब है कि शुक्रवार को आरएलपी नेता हनुमान बेनीवाल की सुरक्षा एकाएक बढ़ा दी गई। हनुमान बेनीवाल के घर क्यूआरटी कमांडों को तैनात कर दिया गया था। इसके पीछे का कारण इंटेलीजेंस इनपुट बताया गया। लेकिन, एकाएक हुए इस सियासी घटनाक्रम ने राजस्थान में सियासी चर्चाओं के बाजार गरमा दिया।
सूत्रों के मुताबिक विधानसभा चुनाव में भी भाजपा हनुमान बेनीवाल के संकर्प में थी, लेकिन दोनों के बीच गठबंधन नहीं हुआ। हालांकि, इससे पहले 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने हनुमान बेनीवाल के साथ एलायंस किया था। भाजपा ने नागौर की सीट को हनुमान बेनीवाल के लिए छोड़ा था। हनुमान की पार्टी आरएलपी ने सिर्फ एक सीट पर चुनाव लड़ा और साढ़े 6 लाख से ज्यादा वोट लिए। महज एक सीट पर चुनाव लड़कर भी हनुमान को कुल वोटों में से 2.1 प्रतिशत वोट मिले थे।
हनुमान को क्यों साधना चाहती है भाजपा
विधानसभा चुनाव में हनुमान बेनीवाल भले ही एक सीट जीत पाए हो, लेकिन वोटों के लिहाज से भाजपा और कांग्रेस के बाद वे तीसरे नंबर पर रहे। बीएसपी, सीपीएम, आप जैसी राष्ट्रीय पार्टियां भी आरएलपी से बहुत पीछे रह गईं। हनुमान बेनीवाल की पार्टी को विधानसभा चुनाव में 9 लाख 46 हजार से ज्यादा वोट मिले, जबकि सीपीएम को 3 लाख 82 हजार, बीएसपी को 7 लाख 21 हजार और आप को 1 लाख 45 हजार वोट ही मिल पाए। हालांकि, हनुमान के वोट सीटों में कनवर्ट नहीं हो पाए, लेकिन लोकसभा चुनाव के लिहाज से वे एक बड़ा फैक्टर हैं। कम से कम 3 सीटों पर उनका सीधा असर है। हनुमान बेनीवाल और भाजपा की तरफ से अभी तक गठबंधन को लेकर कोई बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन भाजपा अच्छी तरह जानती है कि बेनीवाल कई सीटों पर समीकरण बदल सकता है।