राजस्थान प्रशासनिक सेवा की प्री परीक्षा 2013 के पेपर लीक मामले में गिरफ्तार अमृतलाल मीणा सिर्फ अभ्यर्थियों को जुटाने वाला ठेकेदार था। असली मास्टरमाइंड तो पेपर लीक कराने वाला है, जिसने एक अभ्यर्थी को प्री और मेंस पास कराने के लिए 30 लाख का ठेका लिया था।
एसओजी ने इस मास्टरमाइंड की पहचान कर ली है और दावा किया है कि वह जल्द ही पकड़ा जाएगा। एसओजी ने राज्य के बाहर का निवासी बताए जा रहे इस मास्टरमाइंड के नाम का खुलासा नहीं किया है।
एसओजी ने अमृतलाल मीणा और उसके साथियों संजीव व हंसराज को पांच दिन के रिमांड पर लिया है। पूछताछ में खुलासा हुआ कि पेपर परीक्षा से एक दिन पहले ही आउट हो गया था। अभियुक्तों ने अपने परिचित विशेषज्ञ से पेपर हल करवाया और कुछ रिश्तेदारों को देने के साथ कई अभ्यर्थियों को बेचा।
15 दिन में खोला राज
अब एसओजी यह पता लगाने में जुटी है कि अभियुक्तों ने रिश्तेदारों को पेपर बेचा या मुफ्त में दिया। इसके लिए मेरिट में आए अभियुक्तों के परिचितों से भी पूछताछ होगी। अब आरपीएससी ने यह परीक्षा निरस्त कर दो माह में करवाने का निर्णय किया है।
एसओजी के एडीजी आलोक त्रिपाठी ने बताया कि आरपीएससी ने यह मामला 15 दिन पहले ही एसओजी को सौंपा था। जांच के लिए एसओजी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ललित शर्मा के नेतृत्व में टीम बनाई गई और 15 दिन में ही गिरोह का भंडाफोड़ कर दिया गया।
एसओजी एसपी सुरेन्द्र कुमार ने बताया कि फरवरी में हुई सेकंड ग्रेड अध्यापक भर्ती परीक्षा के सम्बंध में करौली के कोतवाली थाने में दर्ज प्रकरण की भी जांच की जाएगी। पेपर लीक के इस मामले में भी अमृतलाल मीणा, कृपाल मीणा और एलएल मीणा नामजद है।
आरपीएससी को यूं हुआ शक
इस परीक्षा की मेरिट में 50 छात्रों में से 32 एसटी के थे और ये सभी एक ही क्षेत्र के थे, जिससे आरपीएससी को फर्जीवाड़े का शक हुआ।
आरपीएससी ने जांच के लिए एसओजी को गुप्त पत्र भेजा। जांच में पता चला कि सरगना अमृत लाल के परिवार और रिश्तेदारी के 20 लोग आरएएस प्री की टॉप-50 मैरिट में आए। इन सभी पर अनुचित तरीके से परीक्षा देने का आरोप है।
खास बात यह रही कि इस गिरोह के सदस्य भी मेरिट में आए थे। सरगना अमृत लाल मीणा, संजीव मीणा, हंसराज मीणा और सुनील कुमार समेत अमृत की पत्नी भी आरएएस प्री की मैरिट में आए थे।