नौकरी को लेकर पिछले लंबे समय से संघर्ष कर रहे बैराज विस्थापित संघर्ष समिति के दो बुजुर्ग सोमवार की सुबह तड़के माधोपुर में उपायुक्त संयम अग्रवाल के निवास स्थान के सामने बिजली के टावर पर चढ़ गए। टावर से कुछ दूरी पर बिजली की तारों की मेंटीनेंस का काम चल रहा था। जिसके चलते बिजली बंद कर दी गई थी। इसके चलते एक बड़ा हादसा होने से बच गया।
बांध प्रशासन और सिविल प्रशासन की फायर ब्रिगेड, पुलिस समेत अन्य अधिकारी मौके पर मौजूद हैं। कई बार समझाने के बावजूद बुजुर्ग नीचे उतरने को राजी नहीं हुए। वहीं, नीचे खड़े अन्य बैराज विस्थापितों ने पंजाब सरकार और बांध प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
250 मीटर ऊंचाई के बिजली टावर पर चढ़े बुजुर्गों में एक 87 वर्षीय सरम सिंह और 77 वर्षीय कुलविंदर सिंह हैं। बैराज औसत संघर्ष कमेटी जेनी-जुगियाल के प्रधान दयाल सिंह ने बताया कि पिछले लंबे समय से वह लोग नौकरी की मांग कर रहे हैं। बांध प्रशासन ने योग्य विस्थापितों को नौकरी देने के बजाय फर्जी लोगों को नौकरी दी। उन्होंने कहा कि इस बार सभी बैराज बांध विस्थापित इसी टावर के नीचे दिवाली मनाएंगे। जब तक उनको रोजगार नहीं मिलता तब तक उक्त बुजुर्ग टावर से नीचे नहीं उतरेंगे।
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28 वर्ष से चल रहा संघर्ष, कई बार टावरों पर चढ़े
बैराज बांध विस्थापित पिछले 28 वर्षों से रोजगार की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। यह विस्थापित कभी मलिकपुर डीसी दफ्तर की पानी की टंकी तो कभी जुगियाल में चीफ इंजीनियर कार्यालय के सामने बीएसएनएल टावर पर चढ़ जाते हैं। एक बार एक विस्थापित ने खुद को आग भी लगा ली पर पुलिस ने उसे बचा लिया। इस बार प्रदर्शनकारी सोमवार को तड़के टावर पर चढ़ गए।
वह फोन कर अपने पारिवारिक सदस्यों को भी सूचित कर रहे हैं कि जब तक प्रशासन उनके पारिवारिक सदस्यों को रोजगार देने की मांग पूरी नहीं करता, तब तक वह नीचे नहीं उतरेंगे। वह आत्मदाह से भी नहीं टलेंगे। बैराज औसती संघर्ष कमेटी प्रधान दयाल सिंह ने बताया कि उनकी जमीन बैराज बांध में अधिगृहित हुई है। सरकार ने त्वरित एक सदस्य को नौकरी देने का वादा किया था।
सरकार ने नौकरियां दी पर अधिकारियों ने मिलीभगत कर 1-1 मरले जमीन वाले लोगों को नौकरियां दिलवा दीं। जिन लोगों की अधिक जमीन अधिगृहित हुई उन्हें नौकरी नहीं मिली। पिछले 28 साल से उनके साथ कोई इंसाफ नहीं हो रहा। इन दौरान 500 से अधिक धरने लगाए।
उन्होंने बताया कि 31 मई 2019 को एसडीएम धार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि 50 लोगों ने गलत ढंग से रोजगार हासिल किया है। डीसी को भेजी रिपोर्ट पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि लंबे अरसे से केवल आश्वासन मिल रहा है। अब भी वह 70 दिन से स्थायी धरना दे रहे हैं लेकिन उनकी सुनवाई नहीं होने से नाराज बुजुर्गों ने यह कदम उठाया है।