मामले में शिकायतकर्ता पंजाब सिंह ने बताया कि लगभग 40 साल पहले गांव की करीब चार कनाल जमीन का बंटवारा गुमानपुरा के रहने वाले मजहबी सिखों के साथ हुआ था। इसके बाद से ही मृतक गुरप्रीत सिंह व उसके परिवार के पास इस जमीन का मालिकाना हक है। वही इस पर खेती भी करते हैं। वीरवार दोपहर को आरोपी 20 से 25 लोगों के साथ पांच गाड़ियों में सवार होकर आए और जमीन पर खेती करने की कोशिश करने लगे। जब उन्हें पता चला तो वे सभी लोग आरोपियों से बात करने के लिए वहां पहुंच गए। हमलावरों ने उनकी एक नहीं सुनी और हाथापाई करने लगे और फिर गोलियां चलानी शुरू कर दी। आरोपियों ने अंधाधुंध गोलियां चलाई। इस दौरान गोली गुरप्रीत सिंह और बेअंत सिंह को लगी और दोनों की मौत हो गई। जबकि पांच अन्य जख्मी हो गई।
आरोपियों को भी गोली से मार देना चाहिए
इस वारदात के बाद जहां पूरे गांव में दहशतहै। मृतकों के परिवार वालों कहना था कि आरोपियों को भी गोली मार देनी चाहिए। बेअंत सिंह के परिवार के सदस्य अमृतपाल सिंह ने बताया कि बेअंत सिंह धान लगाने की मजदूरी करता था और घर पर वही कमाने वाला था। वीरवार को वह केवल चाय लेकर खेतों में गया था। जबकि उनका इस पूरे मामले में किसी से कुछ लेना-देना भी नहीं था।