इस पूरे शो के हीरो परगट सिंह न बन जाएं, इसलिए राजनीति शुरू हो गई। सूत्रों के मुताबिक जालंधर पहुंचने से पहले ही दो गुट बन गए। एक में हार्दिक सिंह तो दूसरी तरफ कप्तान मनप्रीत सिंह, वरुण और मंदीप सिंह थे। दोनों गुटों का अलग-अलग स्वागत हुआ। हार्दिक सिंह का स्वागत उनकी चाची गोल्डन गर्ल भारतीय हॉकी टीम की पूर्व कप्तान और अकाली नेता राजबीर कौर ने किया जबकि दूसरी तरफ परगट सिंह शामिल रहे। उनके साथ पंजाब हॉकी के उपाध्यक्ष अमरीक सिंह और अन्य खिलाड़ी थे।
हालात यह थे कि जिला खेल अधिकारी का कार्यालय भी दो गुटों में बंट गया। कुछ अधिकारी हार्दिक के साथ चले गए जबकि बाकी परगट सिंह के साथ। दरअसल, चारों खिलाड़ी जालंधर कैंट विधानसभा हलके से हैं। इसके विधायक परगट सिंह हैं और इस बार राजबीर कौर अकाली दल से टिकट लेकर परगट सिंह को टक्कर देने की तैयारी कर रही हैं।
विश्व में अगर बात चले कि हॉकी का मक्का कहां है, तो तपाक से उत्तर मिलेगा जालंधर। जालंधर वह जिला है, जिसके रहने वाले चार हॉकी खिलाड़ियों ने इतिहास रच दिया है। चारों बुधवार को जालंधर तो पहुंचे तो लेकिन देश के लिए मैदान में पसीना बहाने वाले चारों खिलाड़ियों के स्वागत के लिए कोई प्रशासनिक अधिकारी नहीं पहुंचा। कुछ रिटायर और मौजूदा अधिकारी पहुंचे, जो हॉकी के खिलाड़ी थे। स्वागत के लिए खेल विभाग ने भी कोई बंदोबस्त नहीं किया। हॉकी प्रेमियों ने अपने स्तर पर जालंधर में जश्न का माहौल जरूर तैयार किया।
टोक्यो ओलंपिक में कांस्य जीत 41 साल बाद इतिहास रचने वाली भारतीय पुरुष हॉकी टीम के कप्तान मनप्रीत सिंह, मनदीप सिंह, वरुण कुमार और हार्दिक सिंह बुधवार दोपहर को जालंधर पहुंचे। उनको अमृतसर से रिसीव करने के लिए पद्मश्री परगट सिंह खुद गए थे। सिर्फ जिला स्पोर्ट्स अधिकारी उमेश शर्मा और एसडीएम बलवीर राजा ही खिलाड़ियों के साथ नजर आए अन्यथा जालंधर में डिवीजनल कमिश्नर से लेकर डीसी और आईजी स्तर के अधिकारियों से लेकर डीजीपी स्तर के अधिकारियों का हेडक्वार्टर है, लेकिन किसी ने इन खिलाड़ियों का स्वागत करने की जहमत नहीं उठाई। एआईजी एनआरआई हरप्रीत मंडेर नजर आए लेकिन वह हॉकी खिलाड़ी हैं, इसलिए वह मौके पर गए।
जालंधर हॉकी का केंद्र बिंदु है। जालंधर की किस्मत है कि यहां के मनप्रीत सिंह ने भारतीय हॉकी टीम की कप्तानी की और कांस्य पदक दिलाया। जालंधर अभी तक 18 ओलंपिक हॉकी खिलाड़ी भारत को दे चुका है, जो मिट्ठापुर और आसपास के इलाके के रहने वाले हैं। ऐसे में कयास लगाए जा रहे थे कि इन खिलाड़ियों के स्वागत के लिए पूरा प्रशासन पलकें बिछाएगा, लेकिन प्रशासन ने तमाम हॉकी प्रेमियों को निराश किया। खिलाड़ी जब जालंधर पहुंचे तो उनका स्वागत हॉकी प्रेमियों द्वारा किया गया।
पहले गुरुद्वारा साहिब फिर गांव के हॉकी मैदान को दिखाए मेडल
कप्तान मनप्रीत सिंह, वरुण और मंदीप सिंह जब जालंधर पहुंचे तो रामामंडी चौक से लेकर विभिन्न स्थानों पर उनका जोरदार स्वागत किया गया। कई स्थानों पर फूल बरसाए गए और खिलाड़ियों के गले में फूल मालाएं डाली गईं। गांव में पहुंचते ही ढोल की थाप पर महिलाएं नाचती नजर आईं। गांव मिट्ठापुर में उत्सव का माहौल था। गांव के तीन शेर गले में पदक डालकर खुली गाड़ी में जब गांव पहुंचे तो ढोल की थाप पर तमाम लोगों के पैर थिरकने शुरू हो गए। खुशी से आंसू छलकने लगे। तीनों खिलाड़ियों ने गांव के गुरुद्वारा साहिब में माथा टेका और कीर्तन श्रवण किया। इसके बाद तीनों गांव में हॉकी मैदान में गए, जहां उन्होंने मैदान में मेडल दिखाकर नमन किया। गांव के हॉकी मैदान में हॉकी खेलने वाले छोटे बच्चों ने उनका जोरदार ढंग से स्वागत किया और फूल बरसाए।