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यूक्रेन से हंगरी होते हुए सकुशल भारत लौटी राजपुरा की नवनीत कौर

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राजपुरा। चारो ओर से आती धमाकों की आवाज....बिना रुके होती फायरिंग....खट् की आवाज होती थी तो लगता था कि फौज कहीं बंकर के भीतर तो नहीं आ गई। अपनों से दूर युद्ध के बीच फंसे भारतीयों ने अपनी सरजमीं पर कदम रखा तो जितनी खुशी उनको हुई उससे कहीं ज्यादा खुशी हुई उनके परिजनों को। यूक्रेन में युद्ध का यह भयावह मंजर देखकर वापस लौटीं राजपुरा की नवनीत कौर युद्ध के बीच से लौटने के बाद कुछ यही बयां करती हैं।
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राजपुरा की नवनीत कौर बुधवार को जैसे ही अपने घर पहुंची घर में खुशी छा गई। परिवार वालों ने बेटी को सकुशल भारत लाने के लिए सरकार का धन्यवाद किया। परिजनों ने लड्डू बांट डाले। सदर थाने के पुलिस क्वार्टर निवासी नवनीत कौर ने बताया कि वह लवीव की मेडिकल यूविवर्सिटी में पिछले 6 वर्षो से एमबीबीएस की शिक्षा ग्रहण कर रही थी। जहां मैं रह रही थी वहां बमबारी नहीं हो रही थी पर मेरे परिवार वालों को मेरी चिंता हो रही थी। रविवार को यूनिवर्सिटी की बस से वह 1194 किमी का रास्ता तय कर सोमवार को हंगरी पहुंची। जहां से भारतीय विमान पर बैठकर दिल्ली एयरपोर्ट पहुंची और राजपुरा पहुंच गई। नवनीत की वापसी से सभी परिवारों में आशा की किरण जागी है कि उनके बच्चे जल्द उनकी आंखों के सामने होंगे।
राजपुरा बनवाड़ी के अभिनंदन कीव से टैक्सी द्वारा 1318 किमी का सफर तय कर स्लोवाकिया पहुंच चुके हैं। जहां उन्हें एक महीने की स्टे मिल चुकी है। वह एक महीना वहीं बिताकर दोबारा से यूक्रेन में शिक्षा ग्रहण करने का इरादा कर चुके हैं। अभिनंदन के पिता काका राम ने बताया कि कीव के हालात बेहद खराब होने से उन्हें चिंता सता रही थी कि हमें पता चला कि हमारा बेटा यूक्रेन के पड़ोसी देश स्लोवाकिया पहुंच गया है जहां वह कुछ राहत महसूस कर रहा है और वह एक माह वहीं बितायेगा अगर हालात ठीक हो गए तो वह यूक्रेन फिर से चला जायेगा। काका राम ने बताया कि अभिनंदन यूक्रेन के कीव नवंबर-2020 में यूरोपियन यूनिवर्सिटी में मैनेजमेंट का कोर्स करने गया और शिक्षा के साथ वह पार्ट टाइम प्रइवेट टैक्सी चलाता रहा है
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घनौर के गांव उलाणा की जसप्रीत कौर नवंबर-2021 से यूक्रेन की नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी खारकीव में शिक्षा ग्रहण कर रही है। उनके पिता वरिन्द्रपाल सिंह ने बताया कि जबरदस्त बमबारी के बाद से वह बेसमेंट में रह रही हैं जिसकी हमें बेहद चिंता है। कई भारतीय उसके साथ हैं लेकिन हमें डर लग रहा है क्योंकि वह पिछले कुछ दिनों से कुछ भी नहीं खा पा रही है। उन्होंने बताया कि पता चला है कि वह जल्द भारतीय छात्रों के ग्रुप के साथ पड़ोसी देश की सीमा तक पहुंचने में प्रयासरत हैं। हमारी अभी उससे बात नहीं हो पा रही। वहीं कांट्रैक्ट बेस पर यूक्रेन के हवीव गया राजपुरा के सुंदर नगर निवासी त्रिलोक राज के परिवार का भी रो-रोकर बुरा हाल है। उसके दिव्यांग पिता तिलक राज दरवाजे पर नजर गड़ाए बैठे हैं कि कब उनके बेटे की घर वापसी की खबर आ जाएगी।
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