पटियाला। पंजाब सरकार ने आर्थिक तंगी से जूझ रही पंजाबी यूनिवर्सिटी (पीयू) के लिए करीब 40 करोड़ की ग्रांट जारी की है। पंजाबी यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (पुटा) ने इसे नाकाफी बताते हुए रोष जताया है।
पुटा के प्रधान डॉ. भुपिंदर सिंह विर्क का कहना है कि पंजाब सरकार की ओर से पूर्व की चन्नी सरकार द्वारा कैबिनेट में पास फैसलों को लागू नहीं किया जा रहा है। इसके तहत यूनिवर्सिटी की मंथली ग्रांट साढ़े 9 करोड़ से बढ़ाकर 20 करोड़ की गई थी। इसके साथ ही यूनिवर्सिटी पर चढ़े 150 करोड़ के कर्ज सरकार ने टेकओवर करने का फैसला लिया था।
गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रही पीयू
शनिवार को भगवंत मान सरकार ने पंजाबी यूनिवर्सिटी के मुलाजिमों व अध्यापकों की तनख्वाहों के लिए अप्रैल, मई व जून महीने की 40 करोड़ 12 लाख 96 हजार 350 रुपये की ग्रांट जारी की। जो प्रति महीने के हिसाब से करीब सवा 13 करोड़ रुपये बनती है। पूर्व चन्नी सरकार ने पीयू की मंथली ग्रांट साढ़े 9 करोड़ से बढ़ाकर 20 करोड़ कर दी थी। पुटा के प्रधान डॉ. भुपिंदर सिंह विर्क ने कहा कि पीयू इस समय गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रही है। अप्रैल महीने की तनख्वाहें मुलाजिमों को अभी तक नहीं मिली हैं। अगर आप सरकार इसी तरह से यूनिवर्सिटी के प्रति उदासीन रवैया रखेगी, तो पीयू का अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।
ग्रांट के लिए यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट देने की भी शर्त रखी
पंजाब सरकार ने एक शर्त रख दी है कि ग्रांट का यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट देने पर ही अगली बार ग्रांट जारी हो सकेगी। इस शर्त का भी पुटा ने विरोध किया है। पुटा के मुताबिक शर्त रखने के बजाय सरकार को 40 करोड़ की यह राशि विशेष ग्रांट के तौर पर देनी चाहिए थी। इसके साथ ही अलग से 20 करोड़ की मंथली ग्रांट जारी होनी चाहिए थी। डॉ. विर्क ने कहा कि मान सरकार पर ब्यूरोक्रेसी हावी हो चुकी है, जिस कारण इस तरह के गलत फैसले लिए जा रहे हैं।
करीब 28 करोड़ रुपये है वेतन और पेंशन का बजट
जानकारी के मुताबिक पंजाबी यूनिवर्सिटी के मुलाजिमों व अध्यापकों के वेतन व पेंशनों का हर महीने का बजट करीब 28 करोड़ है। पीयू यह फंड भी जुटा नहीं पाती है, जिस कारण मुलाजिमों को दो-दो महीने देरी से वेतन मिलता है। पुटा ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने जल्द पूर्व चन्नी सरकार द्वारा लिए फैसलों को लागू न किया, तो टीचिंग व नॉन टीचिंग और पेंशनर सभी मिलकर संघर्ष शुरू कर देंगे।