पटियाला। पंजाब के थर्मल प्लांटों में कोयले का संकट खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। कोयले की कमी के चलते सोमवार को भी थर्मलों की कुल 15 यूनिटों में से छह बंद हैं। जिससे 1870 मेगावाट बिजली प्रभावित होने के चलते पावरकॉम को बाहर से बिजली लेनी पड़ी। लेकिन फिर भी मांग पूरी न होने के चलते गांवों में दो से तीन घंटों तक के कट लगे। प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक रोपड थर्मल प्लांट में 10, लहरा मुहब्बत में छह, राजपुरा में 15, तलवंडी साबो में दो दिनों का कोयला शेष है।
गोइंदवाल साहिब में कोयले के खत्म होने के चलते इसकी दोनों यूनिटें पहले ही ठप पड़ी हैं। उधर कोयले की कमी के कारण सोमवार को रोपड़ की एक 210 मेगावाट की, लहरा की दो यूनिटें 210 और 250 मेगावाट की, तलवंडी साबो की 660 मेगावाट की और गोइंदवाल साहिब की 270-270 मेगावाट की दो यूनिटें बंद रहीं। इससे कुल 1870 मेगावाट बिजली सप्लाई प्रभावित रही।
सोमवार को शाम के समय पीक डिमांड दर्ज की गई, जो 7262 मेगावाट रही। इसके मुकाबले पावरकाम को अपने थर्मलों से 928 मेगावाट, प्राइवेट प्लांटों से 2500 मेगावाट, हाइडल प्रोजेक्टों से 300 मेगावाट समेत अन्य साधनों से कुल 3800 मेगावाट बिजली मिली। ऐसे में मांग को पूरा करने के लिए पावरकाम को बाहर से तकरीबन 3200 मेगावाट लेनी पड़ी। लेकिन मांग व सप्लाई में फिर भी अंतर रहने के चलते गांवों में दो से तीन घंटों तक के कट लगे। उधर पावरकॉम के अधिकारी थर्मलों में कोयले का संकट जल्द खत्म होने के दावे कर रहे हैं।