मोहाली। किसी भी कक्षा के सेक्शन में अतिरिक्त दाखिले पर पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की ओर से लगाए गए जुर्माने का रासा ने विरोध शुरू कर दिया है। बोर्ड ने निजी स्कूलों पर 10वीं और 12वीं के सेक्शन में निर्धारित सीमा से ज्यादा दाखिले करने पर जुर्माना लगाया है। रासा ने निजी स्कूलों की अकादमिक काउंसिल में शामिल सदस्यों से स्पष्टीकरण की मांग की है।
मान्यता प्राप्त एवं एफिलेटिड स्कूल एसोसिएशन रासा यूके ने बोर्ड के उस फैसले का विरोध शुरू कर दिया है, जिसके तहत 10वीं और 12वीं कक्षाओं के सेक्शन में निजी स्कूलों की ओर से निर्धारित सीमा से अधिक दाखिले करने पर जुर्माना लगाया गया है। रासा यूके ने इस कदम पर निजी स्कूलों की अकादमिक काउंसिल में शामिल सदस्यों से स्पष्टीकरण की मांग की है। रासा यूके के चेयरमैन हरपाल सिंह यूके ने बोर्ड के इस कदम का विरोध करते हुए कहा कि बोर्ड के फैसले निजी स्कूलों पर बोझ बनते जा रहे हैं। हरपाल सिंह ने बताया कि खेल नीति-2021 के तहत निजी स्कूलों से स्पोर्ट्स फंड इकट्ठा किया गया। जिसके खिलाफ रासा और स्कूल फेडरेशन ने संयुक्त रूप से हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जिस पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सुधीर मित्तल ने दलीलेें सुनने के बाद बोर्ड को आदेश जारी किए हैं कि वर्ष 2020-21 के बकाया स्पोर्ट्स फंड के लिए किसी निजी स्कूल को विवश नहीं किया जाएगा।
रासा के चेयरमैन हरपाल सिंह यूके ने बताया कि बोर्ड ने 10वीं के लिए एक सेक्शन में 50 विद्यार्थियों की अनुमति थी। जिस पर बोर्ड ने 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी यानि 60 विद्यार्थियों तक के लिए छूट दी थी। इसी तरह 12वीं के ह्यूमिनिटी ग्रुप में 60 विद्यार्थियों पर 20 फीसदी की छूट के साथ 72 विद्यार्थी, कॉमर्स के सेक्शन में 50 विद्यार्थियों पर 20 प्रतिशत की छूट के साथ 60 विद्यार्थियों और साइंस के लिए 50 विद्यार्थियों पर 10 प्रतिशत की छूट के साथ 55 विद्यार्थियों की सीमा अकादमिक सत्र 2020-21 के लिए निर्धारित किया था। रासा ने कहा कि बाद में एफिलेटिड और एसोसिएटेड स्कूलों से इन अतिरिक्त दाखिलों के चलते विद्यार्थियों के सर्टिफिकेट रोक लिए गए और उन पर 5000 रुपये प्रति विद्यार्थी जुर्माना लगा दिया।