मोहाली। शिरोमणि अकाली दल (शिअद) की ओर से विधानसभा हलका मोहाली से चुनावी मैदान में उतारे गए लेबरफेड के पूर्व चेयरमैन एवं पूर्व पार्षद परविंदर सिंह सोहाना के खिलाफ उनकी ही पार्टी के नेताओं ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने मंगलवार को गांव सोहाना के एक होटल में प्रेस कांफ्रेंस कर आरोप लगाया कि पार्टी प्रधान सुखबीर सिंह बादल से टिकट देने में चूक हुई है। परविंदर सिंह सोहाना पार्टी का सच्चा सिपाही नहीं है। जब पार्टी को उनकी जरूरत थी तो वह पार्टी को छोड़कर चले गए थे। नेताओं ने पार्टी हाईकमान को दो दिन में अपने फैसले पर विचार करने के लिए लिखा है। साथ ही एलान किया है कि अगर पार्टी ने उनकी सुनवाई नहीं की तो वे सख्त फैसला लेंगे और जरूरत पड़ी तो पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ चलेंगे।
प्रेस कांफ्रेंस में हलके के करीब 30 अकाली नेता, सरपंच, ब्लॉक समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य समेत युवा नेता शामिल थे। इस मौके पर ब्लॉक समिति सदस्य एवं अकाली नेता अवतार सिंह मौली ने कहा कि परविंदर सिंह सोहाना को टिकट देने पर सभी नेता और कार्यकर्ता नाराज हैं। वह पार्टी प्रधान सुखबीर सिंह बादल का सत्कार करते हैं, लेकिन उन्हें दुख है कि इस मामले उनकी सुनवाई नहीं की। इस मामले में उन्हें विश्वास में नहीं लिया गया। इस संबंधी सभी नेता पार्टी प्रधान को बता चुके हैं कि परविंदर सिंह सोहाना पार्टी के लिए उचित चेहरा नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ समय पहले निगम चुनाव हुए थे। उस समय उसने पार्टी निशान पर चुनाव लड़ने से मना कर दिया था। उनका कहना था कि पार्टी के निशान पर वोट नहीं पड़ते हैं। ऐसे में पार्टी को छोड़कर चले गए थे और आजाद ग्रुप में शामिल हो गए थे। लेकिन दो महीने में ही परविंदर सिंह सोहाना पार्टी में आ गए। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि पार्टी प्रधान पर क्या दबाव बना कि सोहाना को टिकट दी गई। बता दें कि नगर निगम चुनाव से ठीक पहले परविंदर सिंह सोहाना ने पार्टी को अलविदा कर दिया था। वह पूर्व मेयर कुलवंत सिंह के आजाद ग्रुप में शामिल हो गए थे। इस दौरान निगम की 50 सीटों में आजाद ग्रुप 11 सीटें जीतने में कामयाब रहा था। वहीं, सोहाना की पत्नी हरजिंदर कौर चुनाव जीती थी। अक्तूबर, 2021 में वह अपनी पत्नी और समर्थकों सहित अकाली दल में दोबारा शामिल हो गए थे
आठ बार मिले थे सुखबीर बादल से
शिअद के नेताओं ने कहा कि डेढ़ महीने में पार्टी प्रधान से आठ मिल चुके हैं। वह सभी बातें उनके सामने रख चुके थे। टिकट एनाउंस होने से डेढ़ घंटा पहले वह पार्टी प्रधान सुखबीर बादल से झजेड़ी में मिले थे। इस दौरान सुखबीर बादल ने उन्हें विश्वास दिलाया था कि इस बार उन्हें योग्य नेता देंगे। लेकिन जैसे ही पता चला कि परविंदर सिंह सोहना को उम्मीदवार घोषित किया है तो उनकी नींद उड़ गई। जब निगम चुनाव हुए तो हमारे पास एक पार्षद तक नहीं था। बड़ी मुश्किल से चुनावी मैदान में उतरे थे और 48 सीटों पर लड़े थे। हमारे उम्मीदवार को आठ-आठ वोट पड़े थे।
इस मौके पर शिअद नेताओं ने बताया कि जिला इकाई की एक सात सदस्यीय कमेटी ने दो नामों की सिफारिश पार्टी हाईकमान को भेजी थी। इनमें केवल करमजीत सिंह कम्मा और अजय पाल मिंडूखेड़ा का नाम था। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी ने जब उम्मीदवार के लिए सर्वे करवाया तो उस समय परविंदर सिंह सोहाना ने पैसे खर्च करके सर्वे अपने हक में करवाया था। साथ ही पार्टी प्रधान को गुमराह किया कि सभी नेता उसके साथ हैं, इसके बाद वह टिकट लेकर आए हैं।