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अंतर्कलह और सत्ता विरोधी लहर ने डुबाई कांग्रेस की नाव

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मोहाली। कांग्रेस के प्रदेश में पांच साल के कार्यकाल में मोहाली शहर कोई प्रोजेक्टों की सौगात मिली। वहीं, गांव से लेकर शहर तक विकास का पहिया घूमा। कोरोना महामारी में भी लोगों को बेहतर सेहत सुविधाएं देने में सरकार ने कोई कमी नहीं छोड़ी, लेकिन अंतर्कलह और सत्ता विरोधी लहर की वजह से कांग्रेस मोहाली में अपने मजबूत किले को नहीं बचा पाई। लगातार 15 साल से चुनाव जीतते आ रहे बलबीर सिंह सिद्धू को इस बार हार का मुंह देखना पड़ा और उन्हें इस हार का मुंह आप के उम्मीदवार रियल एस्टेट कारोबारी एवं पूर्व मेयर कुलवंत सिंह ने दिखाया है।
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जानकारी के मुताबिक अधिकतर गांवों में कांग्रेस के समर्थन वाली पंचायतें और नगर निगम मोहाली पर कांग्रेस का कब्जा है। लेकिन इसके बावजूद भी गांव से लेकर शहर तक कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा है। पहले राउंड में जो बढ़त आप ने बनाई थी, उसे कांग्रेस आखिर तक तोड़ नहीं पाई। राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो गांवों में कांग्रेस को नुकसान होने की वजह शामलात जमीनों को जबरदस्ती लीज पर देने के प्रस्ताव पास करवाने, लोगों पर दर्ज झूठे केस और सत्ता विरोधी लहर थी। इस वजह से लोगों में नाराजगी ज्यादा थी। ऐसी ही स्थिति शहरी एरिया में भी बनी। भले ही निगम की 37 सीटों पर कांग्रेस का कब्जा था, लेकिन सूत्रों की मानें तो अधिकतर पार्षदों की सुनवाई नहीं हो रही थी। पार्षदों की दलील होती थी कि वह तो बस नाम के पार्षद है, उनकी सुनवाई नहीं होती है। ऐसे में अंदर से पार्टी के साथ नहीं चल रहे थे। इसका प्रमाण इससे मिलता है कि नामी पार्षदों में पार्टी को नुकसान हुआ है। इसके अलावा कालोनियों में भी नुकसान पड़ा। इसकी वजह आखिरी समय में सीएम चरणजीत सिंह चन्नी की ओर से प्रवासी लोगों को लेकर दिया गया बयान भी माना रहा है।
खरड में भी अंतर्कलह से हुआ नुकसान
खरड़ में भी पार्टी को अंतर्कलह से ही नुकसान पहुंचा है। एक तो उम्मीदवार घोषित करने में देेरी की गई। इतना ही नहीं आखिरी समय में मोरिंडा से वरिष्ठ कांग्रेसी नेता और जिला योजना कमेटी के चेयरमैन रह चुके विजय शर्मा टिंकू को चुनावी मैदान में उतारा गया। इससे नाराज होकर वरिष्ठ कांग्रेसी नेता जगमोहन सिंह कंग ने पार्टी छोड़ दी। वहीं, जसविंदर सिंह जस्सी भी पार्टी को अलविदा कह आजाद उम्मीदवार में उतरे। इसी तरह संयुक्त समाज मोर्चे के उम्मीदवार परमदीप सिंह बैदवान भी कांग्रेस में कई उच्च पदों पर रह चुके हैं। इनकी वजह से पार्टी को नुकसान हुआ। जगमोहन सिंह कंग खुलकर चन्नी और वरिष्ठ नेता का विरोध कर रहे थे।
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