मोहाली। वीआईपी जिले में पिछले दो साल के दौरान अग्निशमन विभाग ने 700 संस्थानों को नोटिस जारी किए हैं। ये नोटिस स्कूल, अस्पताल, पीजी, औद्योगिक इकाईयों और शोरूम मालिकों को जारी किए गए हैं। अहम बात यह है कि नोटिस जारी होने के बावजूद 550 इमारतों ने फायर फाइटिंग सिस्टम नहीं लगवाया। अब अग्निशमन विभाग दोबारा से ऐसी इमारतों को चिन्हित करने जा रहा है, जो आग लगने के दौरान सुरक्षित नहीं हैं।
पंजाब के सुनियोजित शहर मोहाली की इमारतें आग से सुरक्षित नहीं हैं। चाहे वे स्कूल हों, अस्पताल, औद्योगिक इकाइयां या फिर शोरूम्स। पिछले कुछ साल के दौरान आगजनी की कईं बड़ी घटनाएं हुई हैं। अग्निशमन विभाग ने पिछले दो साल में जिले की जिन 700 इमारतों को नोटिस भेजे हैं यह इमारतें आगजनी की घटनाओं से बचने के लिए किसी भी सूरत में सुरक्षित नहीं हैं। अहम बात यह है कि नोटिस जारी होने के बावजूद 550 इमारतों ने अग्निशमन उपकरण नहीं लगवाए हैं। महज 150 इमारतों ने ही अग्निशमन विभाग के नोटिस को गंभीरता से लेते हुए अपनी इमारतों को सुरक्षित बनाया है। इसकी जानकारी इन इमारतों के मालिकों ने अग्निशमन विभाग को देते हुए एनओसी हासिल की है।
वहीं, इस बारे में मोहाली के फायर ऑफिसर मोहन लाल ने बताया कि लोग फायर फाइटिंग सिस्टम को लेकर गंभीर नहीं हैं। लोगों को नोटिस जारी करने के बावजूद इसकी संज्ञान नहीं लिया गया। इनके बारे में जिला प्रशासन सहित स्थानीय निकाय विभाग के आला अधिकारियों को जानकारी दी गई थी। इसके बावजूद अधिकांश इमारतों ने न तो एनओसी ही ली और न ही फायर फाइटिंग सिस्टम ही लगाया। हर इमारत के लिए प्रत्येक वर्ष एनओसी को रिन्यू करवाना अनिवार्य है। हालांकि लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते।
हर बड़ी इमारत में फिक्स फायर फाइटिंग सिस्टम होना जरूरी
आग से बचाव के लिए हर इमारत के लिए अलग नियम निर्धारित हैं। एक मंजिला इमारत चाहे वो रिहायशी हो या व्यावसायिक, उसमें पोर्टेबल फायर एस्सटिंग यूजर यानि आग बुझाने वाले सिलिंडर का होना अनिवार्य है। इसी तरह दो या उससे अधिक मंजिला इमारतों के लिए फिक्स फायर फाइटिंग सिस्टम का होना जरूरी है। इसी तरह औद्योगिक इकाइयों, अस्पतालों, बड़े स्कूलों और अन्य बड़ी इमारतों में जगह के मुताबिक 75 हजार से 4 लाख लीटर का अंडरग्राउंड वाटर टैंक होना चाहिए। जो आग बुझाने के स्वचालित सिस्टम से जुड़ा हो। ऐसे ही जिन इमारतों की छत 15 मीटर से अधिक ऊंची है, उनमें दोनों ओर 6-6 मीटर की जगह खाली होनी चाहिए, ताकि आग लगने की सूरत में अग्निशमन विभाग के कर्मचारी वहां तक पहुंच सकें।