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बिल जमा नहीं करने पर जीरकपुर की ‘मोना ग्रीन’ सोसायटी का बिजली कनेक्शन काटा

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जीरकपुर। वीआईपी रोड पर स्थित मोना ग्रीन नामक सोसायटी में बुनियादी सुविधाओं की देखरेख करने वाली कंपनी रातोंरात अपना सामान उठाकर फरार हो गई। यह आरोप सोसायटी की वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने लगाए हैं। उनका कहना है कि इस सोसायटी के बिल्डर ने माधव इंफ्रा. नामक कंपनी को सोसायटी के अंदर बुनियादी सुविधाओं की देखरेख का काम सौंपा था। लेकिन यह कंपनी इस करार की शर्तों को पूरा न करते हुए पहले ही अपना काम अधर में छोड़कर चली गई। इस कारण सोसायटी के अंदर लिफ्ट्स, साफ-सफाई, पानी आदि बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलने के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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इस सोसायटी की वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष पवन गर्ग और उपाध्यक्ष राजन जैन ने बताया कि 9 महीने पहले मोना ग्रीन टाउनशिप के बिल्डर तेजिंदर सेतिया ने उक्त कंपनी को सोसायटी के अंदर बुनियादी सुविधाओं का कार्यभार सौंपा था। इस कंपनी को यहां फ्लैट्स में रहने वाले फ्लैट मालिक प्रतिमाह मेंटेनेंस चार्जेस देते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उक्त कंपनी ने कुछ फ्लैटों को अवैध रूप से बिजली की सप्लाई महंगे दामों पर की, इस वजह से बिजली बोर्ड की टीम ने छापा मारकर भारी भरकम जुर्माना लगाया और इस जुर्माने को अदा करने से कंपनी के पदाधिकारी पल्ला झाड़ रहे हैं।
वहीं, दूसरी ओर सोसायटी के लोगों को जब इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने कंपनी को प्रतिमाह मेंटेनेंस चार्ज देना बंद कर दिया। इसके बाद कंपनी पर बिजली विभाग ने जुर्माना लगाया है, जिसे कंपनी को भरना चाहिए। कंपनी के पदाधिकारियों ने लाखों रुपये का बिजली बिल जमा नहीं किया था। इस कारण पिछले हफ्ते बिजली विभाग ने उनकी सोसायटी का बिजली कनेक्शन काट दिया है। अब लोगों को यहां लिफ्ट्स, स्ट्रीट लाइट्स, पानी आदि की सुविधा न मिलने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके बाद यह मामला एसडीएम कार्यालय में पहुंचा, जिन्होंने कंपनी को बिजली कनेक्शन बहाल करवाने का आदेश दिया। इस पर कंपनी ने बिजली कनेक्शन चालू करवा दिया है, लेकिन बिजली का बिल नहीं भरा और वीरवार को बिजली विभाग के अधिकारी दोबारा सोसायटी का कनेक्शन काटकर चले गए और दो दिन में बिजली बिल जमा करने की चेतावनी देकर गए हैं।
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पिछले कुछ महीनों से सोसायटी वासियों ने प्रतिमाह के मेंटेनेंस चार्जेस देने बंद कर दिए थे। इस कारण स्टाफ को वेतन देना मुश्किल हो गया है और साथ ही जो बिजली चोरी के आरोप लगाए जा रहे हैं, वह सरासर गलत हैं। दरअसल बिजली चोरी की घटना दो साल पुरानी है। जबकि उनकी कंपनी को सोसायटी का ठेका अगस्त, 2020 में अलॉट हुआ था। पिछले दो महीनों से सोसायटी वासियों ने उन्हें एक पैसा नहीं दिया। इस कारण उन्होंने काम अधर में छोड़ दिया है। अब यह मामला एसडीएम डेराबस्सी के पास विचाराधीन है, जिन्होंने मामले को दो दिन में हल करवाने का आश्वासन दिया है। -सुनील पारा, माधव इंफ्रा. प्रा. लिमिटेड कंपनी के मालिक।
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