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पॉलीवुड की चिंता: कोरोना काल में बनकर तैयार हुईं 200 पंजाबी फिल्में, अब रिलीज करना बना चुनौती

Mon, 02 Aug 2021 12:57 PM IST
निवेदिता वर्मा नगमा सिंह, संवाद न्यूज एजेंसी, मोहाली

सार

अब तकनीकों की मदद से तीन से छह महीने में फिल्म तैयार होती है। इतिहास से जुड़ी फिल्म का बजट पांच करोड़ से भी अधिक चला जाता है, जबकि आधुनिक समय वाली फिल्में कम खर्च में तैयार होती हैं।
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फिल्म - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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कोविड काल की दूसरी लहर के कमजोर पड़ने के बाद एक बार फिर से सिनेमा हॉल खुल गए हैं। लेकिन पंजाबी फिल्म निर्माताओं की चिंता कम नहीं हो रही है। कोरोना काल में छोटे-बड़े बजट की करीब 200 फिल्में बनकर तैयार हो गईं हैं। अब इन्हें रिलीज करना एक बड़ी चुनौती बन गई है। अगर एक हफ्ते में तीन-चार फिल्में रिलीज की जाती हैं, तो सात-आठ महीने फिल्मों को रिलीज करने में लग जाएंगे। ऐसे में फिल्मों की लागत कैसे निकलेगी, इस सवाल ने फिल्मी निर्माताओं की नींद उड़ा रखी है। वहीं, फिल्मी विशेषज्ञों की मानें तो एक फिल्म को कम से कम तीन हफ्ते सिनेमा हॉल में चलने के बाद ही खर्च निकालकर थोड़ा बहुत मुनाफा हो पाता है।

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कोरोना की दस्तक के बाद सिनेमा से लेकर सभी चीजें बंद हो गई थीं। इसके बाद जब अनलॉक की प्रक्रिया हुई तो उस दौरान पॉलीवुड से जुड़े फिल्म निर्माताओं ने जमकर काम किया। दो करोड़ से लेकर दस करोड़ तक के बजट वाली फिल्मों पर काम हुआ है और कई नामी कलाकारों की फिल्मों की शूटिंग हुईं।


इसी बीच एक बार सिनेमा हाल खुले, सब कुछ तैयार हो गया था। उम्मीद थी कि हालत बदलेंगे। एक नामी पंजाबी फिल्म रिलीज भी की गई, लेकिन फिर कोरोना की दूसरी लहर ने दस्तक दे दी थी। इसके चलते प्रोजेक्ट अधर में लटक गया था। जानकारों की मानें तो कोरोना के बाद सिनेमा भले ही खुल गए हैं, लेकिन अब लोगों की आर्थिक स्थिति पहले जैसी नहीं है कि हर हफ्ते लोग फिल्म देखने निकल पड़ेंगे। इसके अलावा विदेशों में भी अभी तक सख्ती चल रही है। ऐसे में पंजाब निर्माताओं की टेंशन जायज है। क्योंकि फिल्मों पर करोड़ों रुपये का दांव लगा है।

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ऐसे तैयार होती हैं फिल्में और कैसे पूरे होते हैं खर्चे

वेहली जनता प्रोडक्शन के मालिक निर्देशक और निर्माता मनप्रीत जौहल बताते हैं कि अब तकनीकों की मदद से तीन से छह महीने में फिल्म तैयार होती है। इतिहास से जुड़ी फिल्म का बजट पांच करोड़ से भी अधिक चला जाता है, जबकि आधुनिक समय वाली फिल्में कम खर्च में तैयार होती हैं। इसके अलावा अगर बात की जाए तो एक निर्माता के तौर पर फिल्म पर आने वाले खर्च का 30-35 प्रतिशत भुगतान कलाकारों को किया जाता है। उन्होंने बताया एक फिल्म को अच्छा मुनाफा कमाने के लिए कम से कम तीन हफ्तों का समय सिनेमा की स्क्रीन पर मिलना जरूरी है।

अब बॉलीवुड की राह पर चलेगा पॉलीवुड
पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री पॉलीवुड भी अब बॉलीवुड की राह पर चलने के लिए तैयार है। उम्मीद है कि इसी महीने ओटीटी प्लेटफॉर्म तैयार हो जाएगा। जिसमें कई नई और पुरानी फिल्में रिलीज की जाएंगी। वहीं 2021 की शुरुआत से पंजाबी वेब सीरीज पर काम किया जा रहा है। उम्मीद है कि यह प्लेटफार्म कलाकारों के लिए वरदान साबित होगा। क्योंकि बॉलीवुड में यह तजुर्बा कामयाब रहा है। ऐसे में उन्हें पूरी दुनिया से दर्शक मिलेंगे। वहीं, पंजाबी फिल्मों को भारत के सभी राज्यों में पसंद किया जाता है। अब पंजाब से ही ट्रेंड सेट होता है।

यह फिल्में कर रहीं रिलीज होने का इंतजार
गिप्पी ग्रेवाल की फिल्म फट्टे दिंदे चक्क पंजाबी, अरदास सरबत दे पले दी, मां, पानी च मदानी, मंजे बिस्तरे-3 शामिल हैं। एमी विर्क और सरगुन मेहता की फिल्म किस्मत-2, निम्रत खैरा, एमी विर्क और सरगुन मेहता जैसे कलाकार की फिल्म ‘सोकन-सोकने’ भी रिलीज के लिए तैयार हैं। इसके बाद लंबे समय से गायब रहे पंजाबी सिंगर अमरिंदर गिल की फिल्म गोरिया नूं दफा करो-2, डैडी कूल मुंडे फूल-2, और 2011 की बहुचर्चित फिल्म यार अनमुल्ले का दूसरा भाग, सिंगर निंजा फिल्म गुड लक जट्टा और सोनम बाजवा की करीब आधा दर्जन बड़े बजट की फिल्में पर्दे पर आने के लिए इंतजार कर रही हैं। इनमें बाजवा और गुरनाम भुल्लर की फिल्म गुड्डियां पटोले-2, गायक सिद्धू मूसेवाला की फिल्म मूसा जाट और यस आई एम स्टूडेंट शामिल हैं। इनके अलावा दिलजीत दोसांझ की ‘हौसला रख’ भी रिलीज का इंतजार कर रही है। 
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कोरोना काल में सभी को हुआ नुकसान

पॉलीवुड में पिछले दो साल में सिर्फ 20 प्रतिशत ही फिल्मों पर काम हुआ है। मेरी खुद की बड़े बजट की 6 और 2 छोटे बजट की फिल्में रिलीजिंग के लिए तैयार हैं। कोरोना काल में पंजाबी इंड्रस्टी से जुड़े जितने भी कलाकार थे उन्हें आर्थिक तौर पर नुकसान हुआ। कोरोना काल की मुश्किल घड़ी में इंसानियत के नाते हम सभी कलाकारों की ओर से बनाई गई एसोसिएशन के माध्यम से जरूरतमंदों को हर तरह की मदद पहुंचाई गई।  - गुरप्रीत सिंह घुग्गी, एक्टर एवं कॉमेडियन।

छोटे कलाकारों को आई सबसे ज्यादा दिक्कत 
पॉलीवुड में मेरी खुद की तकरीबन 10-12 फिल्में रिलीजिंग के लिए तैयार हैं। पिछले डेढ़ साल में कोरोना की वजह से सिनेमाघर बंद होने से जो नुकसान पहुंचा है, उसको बयान करना मुश्किल है। क्योंकि बड़े कलाकार अच्छी कमाई के चलते लॉकडाउन जैसा समय बिना काम के भी निकाल पाए, लेकिन कुछ ऐसे कलाकार जो स्पोर्टिंग एक्टर का काम करते हैं। उनके लिए यह समय काफी मुश्किलों वाला रहा। वहीं, अगर मैं अपनी बात करूं तो कुछ न कुछ काम बीच में चलता रहा, जिससे स्थिति सामान्य बनी रही। - मलकीत रौणी, कलाकार  

लॉकडाउन का दौर रहा मुश्किल भरा
कोरोना काल में लॉकडाउन का दौर काफी मुश्किलों भरा रहा। काफी प्रयास के बाद मुझे अपने बेटे की फिल्म की शूटिंग के लिए तीस दिन का समय मिला था। जब मोहाली में फिल्म की शूटिंग के लिए आई थी, तो कोरोना गाइडलाइन का पालन कर रही थीं, इसके बावजूद कोरोना गाइड तोड़ने संबंधी केस दर्ज हुए। फिल्म की शूटिंग तक प्रभावित हुई। इस फिल्म में मैं बतौर एक्टर काम कर रही हैं। मुझे जल्दबाजी में काम खत्म करके वापस मुंबई जाना पड़ा।  - उपासना सिंह, हिंदी-पंजाबी फिल्म कलाकार।

हर तबके के लोगों पर बुरा असर पड़ा
लॉकडाउन का असर हर तबके के लोगों पर पड़ा है। क्योंकि कोरोना काल में लगे लॉकडाउन में सब कुछ बंद रहा। जिसमें अगर कोई सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है तो वह सिनेमा जगत है। बॉलीवुड से लेकर पॉलीवुड तक की फिल्मों का एक जैसा हाल है। सभी सिनेमा घरों के खुलने का इंतजार कर रहे हैं। मेरी चार बड़े बजट की फिल्में रिलीजिंग के लिए तैयार हैं।  -सरदार सोही, फिल्म कलाकार।
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