गॉल ब्लैडर के कैंसर से जूझ रहीं मान कौर की सेहत दिनोंदिन बिगड़ रही थी। कई डॉक्टरों ने जवाब तक दे दिया था लेकिन यह मान कौर का जज्बा था कि वह 22 दिनों तक मौत से लड़ती रहीं। उन्हें जापान में होने वाली मास्टर्स एथलीट चैंपियनशिप में हिस्सा लेना था।
इलाज के दौरान दो दिनों तक बेहोश रहने के बाद जब उन्होंने आंखें खोलीं तो शुद्धि आयुर्वेदिक अस्पताल के आचार्य मनीष से कहा कि ‘पुत्तर मैनूं जापान जाणा ए, मैनूं जल्द ठीक कर दे’। शनिवार को सांसों के थमने के साथ उनकी यह इच्छा अधूरी रह गई।
अगर वह कुछ दिन और जिंदा रहतीं तो जापान में भी तिरंगे का मान बढ़ातीं। आचार्य मनीष ने बताया कि उन्होंने शुक्रवार शाम को जूस पिया था। उनकी सेहत में सुधार भी नजर आ रहा था लेकिन अचानक तबीयत बिगड़ने से उनकी मौत हो गई। यह एक प्राकृतिक मौत है।
बता दें कि डेराबस्सी के पास स्थित देवी नगर के शुद्धि अस्पताल में मान कौर को बीते 8 जुलाई को भर्ती कराया गया था। आचार्य मनीष ने बताया कि बेहोशी के हालत में उन्हें अस्पताल लाया गया था। लीवर और गॉल ब्लेडर कैंसर के आखिरी स्टेज में होने के चलते डॉक्टरों ने जवाब दे दिया था।
डॉक्टरों ने कह दिया था कि वह एक दो दिन से ज्यादा नहीं जी पाएंगी लेकिन आयुर्वेदिक अस्पताल में दाखिल होने के दूसरे दिन 10 जुलाई को उन्हें होश आ गया और 11 जुलाई से वह खाने पीने लगीं। उन्हें जूस, फल व सलाद पर रखा गया था। अब तो वह लोगों से बातें भी करने लगी थीं। आचार्य मनीष ने बताया कि 105 की उम्र में उन्हें हर व्यक्ति की पहचान थी लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
आचार्य मनीष ने बताया कि होश में आने के बाद मान कौर पेट में भयंकर दर्द के चलते चीखने लगी थीं, लेकिन दो दिन बाद आयुर्वेदिक दवाओं से उन्हें आराम मिला। साथ में उन्हें हल्दी, गिलोय, लहसुन, अदरक, अश्वगंधा का पेस्ट बनाकर चटनी के रूप में दिया जाने लगा, जिससे दर्द में काफी आराम मिला। दाखिल होने के पांचवें दिन के बाद वह शाम के वक्त व्हीलचेयर पर टहलने के लिए बाहर निकल गई थीं। उन्हें क्लैपिंग और वाणी गाना काफी पसंद था।