वेहली जनता प्रोडक्शन के मालिक निर्देशक और निर्माता मनप्रीत जौहल बताते हैं कि अब तकनीकों की मदद से तीन से छह महीने में फिल्म तैयार होती है। इतिहास से जुड़ी फिल्म का बजट पांच करोड़ से भी अधिक चला जाता है, जबकि आधुनिक समय वाली फिल्में कम खर्च में तैयार होती हैं। इसके अलावा अगर बात की जाए तो एक निर्माता के तौर पर फिल्म पर आने वाले खर्च का 30-35 प्रतिशत भुगतान कलाकारों को किया जाता है। उन्होंने बताया एक फिल्म को अच्छा मुनाफा कमाने के लिए कम से कम तीन हफ्तों का समय सिनेमा की स्क्रीन पर मिलना जरूरी है।
अब बॉलीवुड की राह पर चलेगा पॉलीवुड
पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री पॉलीवुड भी अब बॉलीवुड की राह पर चलने के लिए तैयार है। उम्मीद है कि इसी महीने ओटीटी प्लेटफॉर्म तैयार हो जाएगा। जिसमें कई नई और पुरानी फिल्में रिलीज की जाएंगी। वहीं 2021 की शुरुआत से पंजाबी वेब सीरीज पर काम किया जा रहा है। उम्मीद है कि यह प्लेटफार्म कलाकारों के लिए वरदान साबित होगा। क्योंकि बॉलीवुड में यह तजुर्बा कामयाब रहा है। ऐसे में उन्हें पूरी दुनिया से दर्शक मिलेंगे। वहीं, पंजाबी फिल्मों को भारत के सभी राज्यों में पसंद किया जाता है। अब पंजाब से ही ट्रेंड सेट होता है।
यह फिल्में कर रहीं रिलीज होने का इंतजार
गिप्पी ग्रेवाल की फिल्म फट्टे दिंदे चक्क पंजाबी, अरदास सरबत दे पले दी, मां, पानी च मदानी, मंजे बिस्तरे-3 शामिल हैं। एमी विर्क और सरगुन मेहता की फिल्म किस्मत-2, निम्रत खैरा, एमी विर्क और सरगुन मेहता जैसे कलाकार की फिल्म ‘सोकन-सोकने’ भी रिलीज के लिए तैयार हैं। इसके बाद लंबे समय से गायब रहे पंजाबी सिंगर अमरिंदर गिल की फिल्म गोरिया नूं दफा करो-2, डैडी कूल मुंडे फूल-2, और 2011 की बहुचर्चित फिल्म यार अनमुल्ले का दूसरा भाग, सिंगर निंजा फिल्म गुड लक जट्टा और सोनम बाजवा की करीब आधा दर्जन बड़े बजट की फिल्में पर्दे पर आने के लिए इंतजार कर रही हैं। इनमें बाजवा और गुरनाम भुल्लर की फिल्म गुड्डियां पटोले-2, गायक सिद्धू मूसेवाला की फिल्म मूसा जाट और यस आई एम स्टूडेंट शामिल हैं। इनके अलावा दिलजीत दोसांझ की ‘हौसला रख’ भी रिलीज का इंतजार कर रही है।
पॉलीवुड में पिछले दो साल में सिर्फ 20 प्रतिशत ही फिल्मों पर काम हुआ है। मेरी खुद की बड़े बजट की 6 और 2 छोटे बजट की फिल्में रिलीजिंग के लिए तैयार हैं। कोरोना काल में पंजाबी इंड्रस्टी से जुड़े जितने भी कलाकार थे उन्हें आर्थिक तौर पर नुकसान हुआ। कोरोना काल की मुश्किल घड़ी में इंसानियत के नाते हम सभी कलाकारों की ओर से बनाई गई एसोसिएशन के माध्यम से जरूरतमंदों को हर तरह की मदद पहुंचाई गई। - गुरप्रीत सिंह घुग्गी, एक्टर एवं कॉमेडियन।
छोटे कलाकारों को आई सबसे ज्यादा दिक्कत
पॉलीवुड में मेरी खुद की तकरीबन 10-12 फिल्में रिलीजिंग के लिए तैयार हैं। पिछले डेढ़ साल में कोरोना की वजह से सिनेमाघर बंद होने से जो नुकसान पहुंचा है, उसको बयान करना मुश्किल है। क्योंकि बड़े कलाकार अच्छी कमाई के चलते लॉकडाउन जैसा समय बिना काम के भी निकाल पाए, लेकिन कुछ ऐसे कलाकार जो स्पोर्टिंग एक्टर का काम करते हैं। उनके लिए यह समय काफी मुश्किलों वाला रहा। वहीं, अगर मैं अपनी बात करूं तो कुछ न कुछ काम बीच में चलता रहा, जिससे स्थिति सामान्य बनी रही। - मलकीत रौणी, कलाकार
लॉकडाउन का दौर रहा मुश्किल भरा
कोरोना काल में लॉकडाउन का दौर काफी मुश्किलों भरा रहा। काफी प्रयास के बाद मुझे अपने बेटे की फिल्म की शूटिंग के लिए तीस दिन का समय मिला था। जब मोहाली में फिल्म की शूटिंग के लिए आई थी, तो कोरोना गाइडलाइन का पालन कर रही थीं, इसके बावजूद कोरोना गाइड तोड़ने संबंधी केस दर्ज हुए। फिल्म की शूटिंग तक प्रभावित हुई। इस फिल्म में मैं बतौर एक्टर काम कर रही हैं। मुझे जल्दबाजी में काम खत्म करके वापस मुंबई जाना पड़ा। - उपासना सिंह, हिंदी-पंजाबी फिल्म कलाकार।
हर तबके के लोगों पर बुरा असर पड़ा
लॉकडाउन का असर हर तबके के लोगों पर पड़ा है। क्योंकि कोरोना काल में लगे लॉकडाउन में सब कुछ बंद रहा। जिसमें अगर कोई सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है तो वह सिनेमा जगत है। बॉलीवुड से लेकर पॉलीवुड तक की फिल्मों का एक जैसा हाल है। सभी सिनेमा घरों के खुलने का इंतजार कर रहे हैं। मेरी चार बड़े बजट की फिल्में रिलीजिंग के लिए तैयार हैं। -सरदार सोही, फिल्म कलाकार।