रख लै क्लीनर यारा गीत से छा गए थे सुरिंदर छिंदा
रख लै क्लीनर यारा के गीत से छाए पंजाबी लोक गायक सुरिंदर छिंदा के निधन से उनके चाहने वाले गमगीन हो गए हैं। 80 व 90 के दशक में छिंदा ने अपनी शानदार आवाज से लोगों के दिलों में राज किया। वहीं पंजाबी फिल्मों में शानदार एक्टिंग भी की। छिंदा के करीबी कहते हैं कि वे मिलनसार थे। उन्हें लोगों का खूब प्यार मिला। लुधियाना के गांव छोटी अयाली में जन्मे छिंदा चार साल की आयु में संगीत सीखने लगे थे। संगीत उन्हें विरासत में मिला। पिता बचन राम और माता विदेवती गायकी में थे। उस्ताद मिस्तारी बचन राम ने छिंदा को गायकी सिखाई तो उस्ताद जसवंत भामरा से भी संगीत के गुर सीखे।
छिंदा ने अपनी प्राथमिक शिक्षा हाता शेर जंग के सरकारी स्कूल से पूरी की लेकिन गायकी सीखते रहे। स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद सुरिंदर छिंदा ने इंजीनियरिंग मैकेनिकल का कोर्स किया। लुधियाना में उन्हें नौकरी भी मिल गई। चूंकि वह गायक बनना चाहते थे। नौकरी में मन न लगने पर नौकरी छोड़ दी और प्रोफेशनल सिंगर बनने की ठान ली।
नौकरी छोड़कर निकाली थी कैसेट
नौकरी छोड़ने के बाद छिंदा ने कैसेट निकाला। इस बीच छिंदा का पहला गाना उच्चा बुर्ज लाहौर दा सामने आया। इस गीत से लोगों के बीच जगह बना ली। इसके बाद छिंदा रुके नहीं और गीतों की झड़ी लगा दी। सुरिंदर छिंदा ने 1979 में रख लै क्लीनर यारा गीत का एलबम निकाला। यह गीत हिट हो गया और पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री में जबरदस्त सफलता मिली।
गायकी के साथ-साथ फिल्मों में दिखाए अदाकारी के जौहर
छिंदा ने गायकी के साथ-साथ फिल्मों में जौहर दिखाए। कई हिट फिल्में कीं। इससे उनकी लोकप्रियता को और ऊंचाइयां मिलीं। पुत्त जट्टां दे, अंख जट्टां दी, ऊंचा दर बाबे नानक दा, बदला जट्टी दा, जट्ट जियोणा मौड़, पटोला समेत कई फिल्मों में काम किया। शानदार गायकी और अभिनय के लिए कई इनाम भी मिले। उन्हें पंजाब गौरव रतन पुरस्कार, पंजाब सरकार द्वारा शिरोमणि गायक पुरस्कार सहित विदेश में भी पुरस्कार मिले हैं।
घर पर शोक प्रकट करने पहुंचे दिग्गज
छिंदा के निधन के बाद उनके घर पर शोक संवेदना प्रकट करने वालों की भीड़ लग गई। गायक चमकीला के परिवार सदस्य, कुलदीप माणक के बेटे के अलावा संगीत के दुनिया के नामी लोग पहुंचे। इस बीच पर्यावरण मंत्री मीत हेयर ने उनके निधन पर शोक जताया है। हेयर ने कहा कि उनके जाने से पंजाबी गायकी को बहुत क्षति पहुंची हैं।