पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह
- फोटो : twitter.com/capt_amarinder
अतिरिक्त सत्र न्यायधीश राजकुमार गर्ग की अदालत ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनके बेटे रणइंदर सिंह की ओर से ईडी (प्रवर्तन न्यायलय) को आयकर मामलों की फाइलों का निरीक्षण करने की इजाजत देने संबंधी फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कर दी हैं। ईडी ने फेमा के तहत उनके पास लंबित एक जांच के संबंध में स्थानीय अदालत में लंबित फाइलों का निरीक्षण करने के लिए अर्जियां दायर की थीं।
तत्कालीन ड्यूटी मजिस्ट्रेट जसवीर सिंह की अदालत ने इन याचिकाओं को स्वीकार करते हुए मुख्यमंत्री और उनके बेटे के खिलाफ लंबित आयकर से संबंधित फाइलों का निरीक्षण करने की इजाजत दी थी। 28 सितंबर 2020 को ईडी के अधिकारी इन फाइलों के निरीक्षण के लिए अदालत गए थे लेकिन उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा था।
मुख्यमंत्री और उनके बेटे ने निचली अदालत के फैसले को सेशन कोर्ट में चुनौती दी थी। अतिरिक्त सत्र न्यायधीश अतुल कसाना की अदालत ने उन्हें स्टे दे दिया था। मुख्यमंत्री ने याचिका में दावा किया था कि ईडी के पास इस मामले की जांच करने का कोई अधिकार नहीं है।
आयकर चोरी के कथित आरोपों के साथ आयकर विभाग की फौजदारी शिकायतें स्थानीय अदालत के समक्ष लंबित हैं। याचिका में दावा किया था कि उनका पक्ष जाने बिना आदेश पारित किया गया। इस तरह के आदेश को पारित किया जाना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ था।