नंगल। विश्व सुरक्षित गर्भपात दिवस पर जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर समाजसेवी संस्था अर्पण सोसायटी द्वारा कामन हैल्थ के सहयोग से नंगल के वार्ड नंबर 13 में लगाया गया। जिसमें गर्भपात कानून पर जानकारी देने के साथ आंकड़ों के साथ असुरक्षित गर्भपात से होने वाले नुकसान की भी जानकारी दी गई।
देश में प्रतिवर्ष एक करोड़ 56 लाख गर्भपात होते हैं, जिनमें से 56 प्रतिशत असुरक्षित ढंग से किए जाते हैं। असुरक्षित गर्भपात के कारण 8.5 प्रतिशत महिलाओं की मौत हो जाती है। सेहत विभाग के डॉ. निश्चल शर्मा, अर्पण के निदेशक कुलदीप चंद, अंजना, सीएचओ मनजीत कौर, एलएचवाई सुपरवाइजर गुरविंद्र सिंह, सीमा शर्मा, कुलदीप चंद के अलावा वार्ड की पार्षद वीना ऐरी ने जागरूकता शिविर में शिरकत की।
इस मौके पर उपस्थित महिलाओं को विश्व सुरक्षित गर्भपात दिवस के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया गया कि पीसीपीएनडीटी एक्ट लागू होने के बाद अब एमटीपी एक्ट के अनुसार कानूनी तौर पर अधिकृत गर्भपात के लिए महिलाओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसी कारण महिलाओं को असुरक्षित गर्भपात करवाने को मजबूर होना पड़ रहा है।
इन वक्ताओं ने कहा कि विश्व भर में प्रति वर्ष पांच करोड़ से भी अधिक गर्भपात करवाए जाते हैं। बात अपने देश की करें तो भारत में यह संख्या एक करोड़ 56 लाख है। जिसमें से 56 प्रतिशत असुरक्षित गर्भपात होते हैं। वक्ताओं ने कहा कि भारत में 8.5 प्रतिशत गर्भवती महिलाओं की मौत का कारण असुरक्षित गर्भपात बनते हैं। इसी को देखते हुए 28 सितंबर 2015 से विश्व सुरक्षित गर्भपात के तौर पर मनाया जाता है।
अर्पण के निदेशक कुलदीप चंद ने कहा कि कामन हैल्थ द्वारा विभिन्न समाजिक संस्थाओं के साथ किए सर्वे में पाया गया कि कोरोना महामारी के दौरान लगभग 9.2 लाख महिलाएं गर्भपात करवाना चाहती थीं। लेकिन, उन महिलाओं को यह सेवाएं उपलब्ध नहीं हुई। उन्होंने कहा कि इस सर्वे में यह भी जानकारी मिली कि भारत में 6.5 लाख महिलाएं न चाहते हुए भी गर्भवती हुई।
10 लाख असुरक्षित गर्भपात और 2600 माताओं की मौत भी हुई। उन्होंने कहा कि सर्वे के अनुसार 36 देशों में परिवार नियोजन व सुरक्षित गर्भपात को लेकर पाई गई कमियों में 75 प्रतिशत मामले हमारे देश से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि भारत में कई महिलाओं व समाजिक संगठनों को एमपीटी एक्ट जिस के तहत कानूनी तौर पर गर्भपात करवाया जा सकता है के लिए भी अदालतों का सहारा लेन पड़ा।
उन्होंने कहा कि गर्भपात की सुविधा के लिए एमपीटी एक्ट वर्ष 1971 में बना था। इस एक्ट को प्रभावी बनाने के लिए वर्ष 2002, 2003, 2014, 2016 और अब 2021 में संशोधन भी किया गया। साथ ही गर्भपात की समय सीमा में भी वृद्धि की गई। इस मौके पर उन्होंने एमटीपी एक्ट के तहत महिलाओं को मिलने वाली सुविधाओं के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी।
इस मौके पर उपस्थित महिलाओं को जरूरत पडने पर सुरक्षित गर्भपात करवाने की अपील की। इस मौके पर पूजा, जोगिंद्र सिंह, रमेश चंद्र, रीमा धीमान, सुनीता, अंजली, भारती, ममता, शिवानी, मुस्कान, सोनीया, राजवीर कौर, शिफा, रमना, सीमा, मीना, सोना देवी, मोनिका, अमनदीप कौर, राजविंदर कौर व रजनी सहित अन्य उपस्थित थे।