भारतीय सेना के रिटायर्ड सूबेदार संता सिंह ने यूं तो नौकरी के दौरान देश की सरहदों की रक्षा करते हुए बहुत नाम कमाया लेकिन उन्हें खुद से ज्यादा अपने इकलौते कारगिल शहीद बेटे पर गर्व है। संता सिंह को अब हर कोई कारगिल शहीद सिपाही प्रदीप सिंह के पिता के नाम से जानता है। संता सिंह कहते हैं कि जब उन्हें शहीद सिपाही प्रदीप सिंह के पिता संता सिंह के नाम से संबोधित किया जाता है तो उनका सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है।
संता बताते हैं कि कारगिल युद्ध के दौरान रोज पंजाब के किसी न किसी गांव में शहीद सैनिकों के शव आते थे। उनका बेटा सिपाही प्रदीप सिंह कारगिल युद्ध का 483वां शहीद था। उससे पहले 482 सैनिक शहीद हो चुके थे। ऐतिहासिक गांव सुधार के संता सिंह ने खुद भी भारतीय सेना की तरफ से युद्ध लड़ा। संता सिंह 1988 में भारतीय सेना से रिटायर हुए और तभी से अपने बेटे प्रदीप को सेना में भर्ती करने के लिए तैयारी करने लगे। सैन्य परिवार होने के कारण प्रदीप को भी बचपन से ही भारतीय सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करने की लगन थी। 14 मई 1979 को जन्मे प्रदीप हायर सेकेंडरी (11वीं) तक शिक्षा लेने के बाद 1997 में भारतीय सेना की फर्स्ट सिख लाइट इन्फेंट्री में भर्ती हुए थे।
शहादत से एक दिन पहले शादी के लिए घर आने के लिए मिली थी छुट्टी
रिटायर्ड सूबेदार संता सिंह ने बताया कि कारगिल युद्ध के दौरान उनके इकलौते बेटे प्रदीप की शादी की तैयारियां भी चल रही थीं। घर में खुशी का माहौल था। शहादत के एक दिन पहले प्रदीप की छुट्टी मंजूर हो गई थी। उसने दो दिन बाद गांव आना था। लेकिन जम्मू कश्मीर पहाड़ी गांव लसाणा सेक्टर पांच में दुश्मन ने अटैक कर दिया। सैन्य टुकड़ी के साथ प्रदीप भी दुश्मन को खदेड़ने के लिए गए। दुश्मन ने ऊंचाई से रॉकेट लांचर दागा जो प्रदीप के पास पेड़ से टकराकर फट गया। इस हमले में प्रदीप गंभीर रूप से घायल हो गए। दुश्मन के पैरा लाइट बम से भारतीय सेना की टुकड़ी के आसपास तेज रोशनी हो गई। इसी रोशनी का फायदा उठाकर दुश्मन ने ऊपर से फायरिंग भी कर दी। गंभीर रूप से घायल प्रदीप ने कश्मीर के सरकारी अस्पताल में दम तोड़ दिया।
आर्मी राइफल एसोसिएशन (एआरए) के कई कंपीटीशन जीत चुके थे प्रदीप
सिपाही प्रदीप सिंह राइफल और पिस्टल निशानेबाजी में निपुण थे। आर्मी राइफल एसोसिएशन के कई कंपीटीशन में प्रदीप मेडल जीत चुके थे। संता सिंह ने बताया कि प्रदीप का सपना राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिये मेडल जीतना था। वो इसके लिए कड़ी मेहनत कर रहे थे।
सरकार से आर्थिक मदद नहीं मिल पाई परिवार को
शहीद सिपाही प्रदीप सिंह के पिता रिटायर्ड सूबेदार संता सिंह को मलाल है कि सरकार ने कारगिल शहीद परिवारों को आर्थिक राहत देने में संवेदनशीलता नहीं दिखाई। उन्हें शहीद बेटे के जमा फंड के अलावा सिर्फ दो लाख रुपये की सहायता राशि दी गई। सरकार ने उनकी बेटी प्रभजोत कौर को सिंचाई विभाग में क्लर्क की नौकरी देने के दो साल बाद नौकरी से निकाल दिया। वजह बताई गई कि अब उसकी शादी हो चुकी है। उन्होंने अदालत में मुकदमा भी लड़ा, लेकिन कुछ हासिल न होता देख मुकदमा भी वापस ले लिया। संता सिंह ने कहा कि सरकार को कारगिल शहीद परिवारों को चिह्नित कर उन्हें और वित्तीय सहायता देनी चाहिए। आज हर शहीद परिवार को 50 लाख से एक करोड़ रुपये तक सहायता राशि दी जा रही है, जबकि उन्हें सिर्फ 2 लाख रुपये ही मिले थे।