शौर्य चक्र विजेता बलविंदर सिंह संधू।
- फोटो : फाइल
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने सोमवार को शौर्य चक्र विजेता बलविंदर सिंह संधू की हत्या के मामले में 10 आरोपियों पर आपराधिक साजिश रचने, सबूत नष्ट करने और गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप तय किए। साथ ही चार को बरी कर दिया। अक्तूबर, 2020 में शौर्य चक्र विजेता बलविंदर सिंह संधू की भिखीविंड में उनके स्कूल में ही गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
हत्या में खालिस्तान लिब्रेशन फोर्स (केएलएफ) का नाम आने के बाद जांच एनआईए को सौंपी गई थी। जांच एजेंसी ने सोमवार को गुरजीत सिंह, सुखदीप सिंह, इंद्रजीत सिंह, सुखमीतपाल सिंह, नवप्रीत सिंह, हरभिंदर सिंह और सुखराज सिंह, रवि ढिल्लों, जगरूप सिंह और आकाशदीप सिंह धालीवाल के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया, जबकि रविंदर सिंह, राकेश कुमार, चांद कुमार और प्रभदीप सिंह मिठू को केस से बरी कर दिया। बलविंदर सिंह संधू की हत्या कांट्रैक्ट किलिंग थी। गैंगस्टर सुख भिखारीवाल ने हत्या के लिए गुरजीत सिंह और सुखदीप सिंह से तीन लाख में सौदा किया था।
200 आतंकियों को खदेड़ा था
सितंबर 1990 में खालिस्तान लिब्रेशन फोर्स के मुखिया परमजीत सिंह पंजवड़ ने 200 आतंकवादियों के साथ बलविंदर सिंह के घर में हमला किया था। आतंकवादियों ने घर को चारों तरफ से घेर लिया था। बलविंदर के परिवार ने आतंकियों के साथ डटकर मुकाबला किया था। पांच घंटे चली मुठभेड़ में पंजवड़ भाग खड़ा हुआ था और उसके कई गुर्गे मारे गए थे। 1993 में गृह मंत्रालय की सिफारिश पर तत्कालीन राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने बलविंदर सिंह, उनके बड़े भाई रंजीत सिंह और दोनों भाइयों की पत्नियों को शौर्य चक्र से सम्मानित किया था।