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पंजाब: अरुणाचल के सात शहीदों के पार्थिव शरीर आज पहुंचेंगे पठानकोट, बर्फीले तूफान की चपेट में आए थे सभी

Fri, 11 Feb 2022 01:07 AM IST
पंजाब ब्‍यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पठानकोट (पंजाब)

सार

एक फरवरी को शहीद गुरबाज का अंतिम बार फोन आया था। शहीद होने की खबर परिवार को गुरुवार को पता चली है। गुरबाज के घर पर उनके पिता गुरमीत सिंह, मां हरजीत कौर और बड़ी बहन जसपिंदर कौर हैं। 
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अक्षय पठानिया की फाइल फोटो। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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अरुणाचल प्रदेश में बर्फीले तूफान की चपेट में आए सात जवानों का पार्थिव शरीर आज पठानकोट पहुंचेगा। अरुणाचल प्रदेश में मौसम की खराबी के कारण विमान उड़ान नहीं भर पाया। शहादत को चार दिन हो चुके हैं। उनके परिवार पार्थिव देह के पहुंचने का इंतजार कर रहे हैं। 

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पंजाब के जवानों में पठानकोट के गांव चक्कड़ निवासी राइफलमैन अक्षय पठानिया भी शामिल हैं, जिनकी पार्थिव देह का पूरा गांव और शहीद के परिजन इंतजार कर रहे हैं। पूरे गांव का माहौल गमगीन है। अक्षय की मां रितू पठानिया और दादी सत्या देवी का रो-रो कर बुरा हाल है। मां ने रोते हुए कहा कि ‘पुत्तरा जल्दी आ जा हुन ते अक्खां चों अथरु वी सुक गये ने।’

शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के महासचिव कुंवर रविंदर सिंह विक्की ने बताया कि अक्षय की पार्थिव देह आज उनके गांव चक्कड़ पहुंचनी थी, लेकिन अरुणाचल में मौसम बेहद खराब होने के कारण इन सात जवानों को लेकर आने वाला विशेष विमान उड़ान नहीं भर सका। अब सेना का विमान इन सभी जवानों की पार्थिव देह लेकर 11 फरवरी को पठानकोट के एयरफोर्स स्टेशन पहुंचेगा। वहां से सभी जवानों की पार्थिव देह को सैन्य वाहनों से उनके गांवों तक पहुंचाया जाएगा, जहां पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। 
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परिवार का इकलौता बेटा था गुरबाज
शहीदों में बटाला के गांव मसानिया के 62 मीडियम रेजीमेंट में तैनात गुरबाज सिंह भी शामिल है। 22 वर्षीय गुरबाज का पार्थिव शरीर शुक्रवार देर शाम को उनके पैतृक गांव मसानिया में पहुंचने की संभावना है। शहीद के चाचा गुरदीप सिंह ने बताया कि गुरबाज सिंह परिवार का इकलौता बेटा था। गुरबाज के पिता गुरमीत सिंह भी सेना से रिटायर्ड हुए थे जिसकी वजह से गुरबाज सिंह भी सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करना चाहता था। 

अपने इसी जज्बे के कारण वह 18 अक्तूबर 2018 को सेना में भर्ती हुआ था। इस समय वह अरुणाचल प्रदेश के कामेंग सेक्टर में तैनात था। नेटवर्क की वजह से परिवार से सप्ताह में एक बार ही बात होती थी। एक फरवरी को उसका अंतिम बार फोन आया था। शहीद होने की खबर परिवार को गुरुवार को पता चली है। गुरबाज के घर पर उनके पिता गुरमीत सिंह, मां हरजीत कौर और बड़ी बहन जसपिंदर कौर हैं। 

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