जालंधर। छठे पे कमिशन में कम हुए पे ग्रेड को बढाने, नर्सिंग भत्ता न मिलने, स्टाफ नर्स का पदनाम नर्सिंग आफिसर किए जाने की मांग को लेकर सिविल अस्पताल में चल रही नर्सिंग स्टाफ की हड़ताल का असर मरीजों पर पड़ना शुरू हो गया है। एक तरफ नर्सें मांगों को मनवाने के लिए इमरजेंसी गेट के बाहर धरना प्रदर्शन कर रही हैं व दूसरी तरफ इमरजेंसी में अस्पताल का रूख कर रहे मरीज अस्पताल के गेट से ही वापस जाने को मजबूर हो रहे हैं। एक तरफ जहां नर्सिंग स्टाफ कह रहा है कि जब तक सरकार उनकी मांगे नहीं मानती, वह हड़ताल पर रहेंगी व दूसरी तरफ नर्सिंग स्टाफ न होने के कारण मरीज अस्पताल छोड़ कर जाने को मजबूर हो रहे हैं। सिविल अस्पताल में 90 स्थायी व 30 अस्थायी नर्सें हड़ताल पर हैं।
मरीजों के अस्पताल से जाने का कारण यह है कि इमरजेंसी वार्ड में मात्र एक ही नर्स मरीजों का इलाज कर रही है व एसएमओ गुरमीत लाल कहना कि अस्पताल में 12 नर्सें मरीजों की देखभाल के लिए तैनात की गई हैं। अब इतने बड़े अस्पताल में 12 नर्सों से काम चलाना सिविल अस्पताल प्रशासन के लिए मुश्किल हो रहा है। अस्पताल में देखभाल सही ढंग से न होने के कारण मरीज अस्पताल से शिफ्ट हो रहे हैं। अस्पताल में दाखिल बच्चों को लोग हड़ताल के चलते अन्य अस्पतालों में शिफ्ट कर रहे हैं। अस्पताल में बनाया गया निक्कू वार्ड मरीज न होने के कारण खाली हो चुका है। हड़ताल के बारे में नर्स एसोसिएशन, पंजाब की प्रधान कांता कुमारी का कहना है कि हमनें हड़ताल पर जाने से 10 दिन पहले ही डीसी, सिविल सर्जन व मेडिकल सुपरिंटेंडेंट को सूचित कर दिया था। उनकी इस बात को सरकार व अस्पताल प्रबंधन ने गंभीरता से नहीं लिया। अगर मरीजों को परेशानी हो रही है तो इसके लिए सिविल अस्पताल प्रबंधन जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि अगर अभी भी सरकार उनकी मांगों को नजरअंदाज करती है, तो हड़ताल जारी रहेगी।