पंजाब के निकाय व नगर काउंसिल चुनावों में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण दिया गया है लेकिन विधानसभा में आरक्षण शून्य है। नतीजन, पंजाब में विधानसभा में महिलाओं की संख्या नाममात्र ही रहती है। 2017 के पंजाब विधानसभा चुनाव में 81 महिला उम्मीदवार मैदान में थी, जिसमें ज्यादातर आजाद के तौर पर खड़ी थी लेकिन सिर्फ छह महिलाएं ही चुनाव जीतकर विधानसभा में अपनी सीट पक्की कर पाईं। यह संख्या 117 सदस्यों वाली विधानसभा का कुल पांच फीसदी है।
2018 में तत्कालीन कैप्टन सरकार ने महिलाओं के लिए बड़ा कदम उठाते हुए विधेयक पारित किया। जिसमें संसद और विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाया था। पंजाब सरकार शहरी स्थानीय निकायों और पंचायती राज संस्थानों में पहले ही महिलाओं के लिए 50 फीसद सीटें आरक्षित कर चुकी है। लेकिन लोकसभा व राज्यसभा में बिल पास नहीं हुए। यह बिल अगर लागू होता है तो पंजाब में 39 महिलाएं विधायक होती।
तीसरी बार पार्षद बनीं कांग्रेस की नेता अरुणा अरोड़ा का कहना है कि पंजाब में तो सभी दलों को आपसी सहमति कर महिलाओं को आगे लाना चाहिए। अगर निकाय चुनाव में 50 फीसदी महिलाओं का कोटा है तो विधानसभा में क्यों नहीं। जितने मत पुरुषों के पड़ते हैं उतने ही महिलाओं के। हम जनसंख्या में बराबर है, हमारे अधिकार संविधान के मुताबिक बराबर हैं, हम निकाय चुनावों में बराबर हैं तो विधानसभा में क्यों नहीं। आज देश महिला सशक्तीकरण का एक बड़ा उदाहरण बनता जा रहा है फिर महिलाओं को विधानसभा से वंचित नहीं रखना चाहिए। कम से कम 50 फीसदी पर हमारा हक बनता है। यह भी गारंटी है कि महिलाओं के पास बराबर गिनती होने से बदलाव की बयार भी देखने को मिलेगी।
प्रदेश भाजपा महिला की प्रधान मोना जयसवाल का कहना है कि यह हमारी पहली मांग है, जिसको लेकर पार्टी प्लेटफार्म पर उठाया भी है। हमने हाईकमान को लिखा भी है कि महिलाओं को अधिक से अधिक टिकट दिया जाए, एक कोटा जरूर रखा जाए। उम्मीद है कि पार्टी हमारी बात सुनेगी और महिलाओं को अधिक से अधिक टिकट दिया जाएगा। हमें आश्वासन भी मिला है कि चिंता न करो, महिलाओं को पूरा सम्मान दिया जाएगा। यह बात चिंतनीय व विचार योग्य है कि पंजाब में छह महिला ही पिछली बार चुनाव जीती थीं।
पंजाब की राजिंदर कौर भट्ठल सूबे की सीएम रह चुकी हैं। इसके अलावा पंजाब से सुखबंस कौर भिंडर केंद्रीय मंत्री रह चुकी हैं जबकि संतोष चौधरी केंद्रीय राज्यमंत्री। अंबिका सोनी व हरसिमरत कौर बादल भी केंद्र में मंत्री रह चुकी हैं। सुखबंस कौर भिंडर जब केंद्रीय मंत्री थी तो उनके नाम का डंका विदेशों में भी बजता था और अंतराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति हासिल की थी।