डीजीपी ने कहा कि पंजाब-हिमाचल सीमा सेंसिटिव है, क्योंकि इस बार पाकिस्तान से पंजाब, जम्मू-कश्मीर समेत अन्य राज्यों में ड्रोन से हथियार और नशा तस्करी के 9 मामले सामने आ चुके हैं। पहले पाकिस्तान को डर रहता था कि तस्करों को भेजेंगे तो बॉर्डर पर मारे जाएंगे पर अब उनके पास ड्रोन से नशा और हथियार सप्लाई करने का विकल्प है।
पंजाब से की तुलना बोले- हमारे यहां 1600 तो पंजाब में 40 हजार मामले
डीजीपी संजय कुंडू ने कहा कि माना हिमाचल में नशे के मामले बढ़ रहे हैं, यह जांच का विषय है। उन्होंने 2018 में सीएम कार्यालय में रहते यह सवाल उठा था कि नशा तस्करी करने वाले कौन हैं। तब सामने आया था कि ये लोग पंजाब और हरियाणा से थे। सीएम ने 2018 में हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तराखंड के सीएम के साथ बैठक की।
2018 में हिमाचल में एक हजार और पंजाब में 23 हजार नशे के केस थे। पंजाब का कहना था कि बॉर्डर एरिया होने के कारण केस बढ़ रहे हैं। डीजीपी ने बताया कि अब हमारे यहां 1600 केस हैं, जबकि पंजाब में 40 हजार केस हैं। जोकि गंभीर विषय है। अब हिमाचल सरकार पंजाब समेत अन्य राज्यों की सरकारों के साथ मिलकर काम कर रही है। इसके चलते उनका यहां आना हुआ।
चिकन नेक पठानकोट काफी संवेदनशील
डीजीपी ने कहा कि पठानकोट एक चिकन नेक की तरह है। जम्मू-कश्मीर से जुड़ने के लिए पठानकोट ही विकल्प है। यहां एयरबेस पर आतंकी हमला हो चुका है, दीनानगर में आतंकी हमला हुआ। 2 महीने पहले लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी पकड़े गए। जिसे चलते पठानकोट-हिमाचल की सीमा काफी भी काफी संवेदनशील है। इसके चलते हिमाचल पुलिस अलर्ट है। बॉर्डर मैनेजमेंट सिस्टम पर जोर दिया जा रहा है।