भारतीय महिला हॉकी टीम ने पहली बार ओलंपिक के सेमीफाइनल में पहुंच कर इतिहास रच दिया। क्वार्टर फाइनल में तीन बार की चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को 1-0 से हरा दिया। सेमीफाइनल में टीम इंडिया का सामना चार अगस्त को अर्जेंटीना से होगा। हालांकि अर्जेंटीना से मुकाबला कड़ा होने की उम्मीद है लेकिन नामी खिलाड़ियों को आशा है कि फिल्म चक दे इंडिया का सीन जरूर देखने को मिलेगा। अगर भारतीय हॉकी टीम की लड़कियां अटैकिंग खेलती रहीं तो फाइनल तक जाएंगी और जरूर जीतेंगी।
चार बार एशियाई खेलों में महिला हॉकी टीम की कैप्टन रहीं ‘गोल्डन गर्ल’ राजबीर कौर ने अटैकिंग गेम को भारतीय खिलाड़ियों की जीत की वजह बताया। अर्जुन अवार्डी राजबीर कौर ने कहा कि भारतीय हॉकी टीम में हार का डर नहीं दिखा। उनके पास खोने को कुछ भी नहीं है, इसलिए वह लगातार अटैकिंग हॉकी खेलती रही।
क्वार्टर फाइनल मुकाबले में टीम ने पहले फर्स्ट हाफ में ही ऑस्ट्रेलिया टीम पर प्रेशर बना दिया और भारतीय टीम विजेता बनी। खिलाड़ियों की चार साल की मेहनत दिखाने का यही वक्त है। आने वाला सेमीफाइनल मुकाबला काफी अहम होगा। राजबीर कौर चार बार एशियाई खेलों में महिला हॉकी टीम की कप्तानी कर चुकी हैं और उन्हें अर्जुन अवार्ड से नवाजा जा चुका है।
भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान गगन अजीत सिंह का कहना है कि एक नया निखार भारतीय महिला हॉकी में आया है। टीम पूरी लय और उत्साह से लबरेज है। यह उत्साह ही टीम को फाइनल तक ले जाएगा। गगन अजीत सिंह का कहना है कि भारतीय महिला हॉकी की टीम ने काफी मेहनत की है।
सुरजीत हॉकी के पूर्व सीनियर वाइस प्रधान और पंजाब हॉकी के उपाध्यक्ष लखविंदरपाल सिंह खैरा का कहना है कि कोरोना काल में महिला हॉकी टीम ने डटकर मेहनत की है। यह उसी का नतीजा है। कोच व कप्तान दोनों ही ऊर्जावान हैं, जिन्होंने भारतीय महिला हॉकी टीम में गजब का उत्साह भर दिया है। पूरा देश आज महिला हॉकी टीम की तरफ देख रहा है और कह रहा है, चक दे इंडिया।