फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जालंधर: सुखबीर बादल की कार पर किसानों ने फेंका जूता, रैली का भारी विरोध, कड़ी सुरक्षा में पुलिस ने निकाला काफिला

Sat, 09 Oct 2021 08:06 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालंधर

सार

भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) के प्रवक्ता कश्मीर सिंह जंडियाला ने कहा कि जब संयुक्त किसान मोर्चा ने सभी दलों को रैली करने से रोका है तो फिर उन्हें जिद नहीं करनी चाहिए। इसके बावजूद सुखबीर बादल चुनावी रैली करने पहुंचे। 
विज्ञापन
सुखबीर बादल की कार पर किसानों ने फेंका जूता - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

शिरोमणि अकाली दल प्रधान सुखबीर बादल का शनिवार को डीएवी यूनिवर्सिटी के पास रैली से पहले किसानों ने डटकर विरोध किया और उनकी कार पर जूता फेंका। सड़क किनारे खड़े किसानों की ओर से फेंका गया जूता कार की टायर पर गिरा। इसके बाद पुलिस ने कड़ी सुरक्षा में सुखबीर का काफिला वहां से निकाला। 

विज्ञापन


किसानों ने अकाली दल समेत तमाम राजनीतिक दलों को चेतावनी दी है कि वह रैलियां न करें, इससे किसानों के आंदोलन पर बुरा असर पड़ रहा है लेकिन अकाली दल ने किसान संगठनों की चेतावनी को अनसुना कर दिया। रैली में सुखबीर सिंह बादल पहुंचे। हालांकि उससे पहले पठानकोट रोड पर भारी संख्या में किसान जुट गए। उन्होंने काले झंडे लेकर जमकर नारेबाजी की। विरोध प्रदर्शन में महिलाएं भी शामिल रहीं।

भारतीय किसान यूनियन (राजेवाल) के प्रवक्ता कश्मीर सिंह जंडियाला ने कहा कि जब संयुक्त किसान मोर्चा ने सभी दलों को रैली करने से रोका है तो फिर उन्हें जिद नहीं करनी चाहिए। इसके बावजूद सुखबीर बादल चुनावी रैली करने पहुंचे। चुनाव में अभी काफी वक्त है। इसकी घोषणा तक नहीं हुई। ऐसे में दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसानों का साथ देने के बजाय नेता रैली कर रहे हैं।
विज्ञापन


भड़के किसानों ने कहा कि राजनीतिक दलों को कम से कम लखीमपुर खीरी हिंसा में मारे गए किसानों के परिवारों के आंखों से आंसू तो सूखने देने चाहिए थे। विधानसभा चुनाव 2022 से पहले बसपा के साथ अकाली दल ने गठजोड़ किया है। इसलिए सुखबीर बादल भी बसपा की रैली को संबोधित करना था। इसे देखते हुए किसान विरोध करने पहुंचे थे। किसानों ने कहा कि नेता उत्तर प्रदेश जाकर राजनीति कर रहे हैं। अगर अकाली दल को किसानों की इतनी चिंता होती तो राजनीतिक रैलियां न करते।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें