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पंजाब में ड्रग्स से सीमन पर असर: बीमारियों की गिरफ्त में पीढ़ियां, बढ़ी बांझपन की समस्या, जनसंख्या पर असर तय

Tue, 27 Oct 2026 03:53 AM IST
Digvijay Singh पंजाब से अंकित यादव की रिपोर्ट

सार

पंजाब में हेरोइन, अफीम, पोस्त, और सिंथेटिक ड्रग के बढ़ते इस्तेमाल ने आने वाले पीढ़ियों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता पैदा कर दी है। 
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ड्रग्स से सीमन पर असर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पंजाब में हेरोइन, अफीम, पोस्त, और सिंथेटिक ड्रग के बढ़ते इस्तेमाल ने आने वाले पीढ़ियों के स्वास्थ्य को लेकर चिंता पैदा कर दी है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) बठिंडा और अमृतसर राजकीय मेडिकल कॉलेज के यूरोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों ने पंजाब में पुरुषों के सीमन (शुक्राणुओं) के आकार में बदलाव की पुष्टि की है।

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अनुमान है कि इस सीमन से जन्म लेने वाले बच्चों में कई तरह की बीमारियां देखने को मिल सकती हैं। एम्स बठिंडा के यूरोलॉजी व एंडोक्राइनोलॉजीविभाग के अध्यक्ष डॉ. कवलजीत सिंह कौड़ा के मुताबिक पंजाब में सीमन में गड़बड़ी वाले पुरुषों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। 

वर्ष 2020 से 2025 तक विभाग की ओर से क्लीनिकल स्तर पर डाटा एकत्रित किया गया। कुल 1,42,732 मरीजों में 12 हजार मरीजों के सीमन के आकार में बदलाव देखा गया है। उधर अमृतसर मेडिकल कॉलेज के यूरो सर्जन डॉ. हर्षदीप बताते हैं कि हर रोज ओपीडी में आने वाले 40 मरीजों में 5-7 मरीज ऐसे मिलते हैं जिनके सीमन में गड़बड़ी मिलती है। विशेषज्ञ इसे वैज्ञानिक भाषा में सीमेन मॉर्फोलॉजी का नाम दे रहे हैं। इनमें से लगभग सभी मरीजों की या तो ड्रग्स की पूर्व हिस्ट्री रही है या वर्तमान में ड्रग्स का सेवन कर रहे हैं।
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बढ़ रही बांझपन की समस्या, जनसंख्या पर असर तय
एम्स बठिंडा के यूरोसर्जन डॉ. कवलजीत सिंह कौड़ा के अनुसार ड्रग्स के सेवन से शुक्राणुओं की गतिशीलता और उनकी संख्या पर गहरा असर पड़ रहा है। इसका असर ड्रग्स के प्रकार और सेवन करने की अवधि पर भी निर्भर करता है। डॉ कौड़ा ने व्यक्ति का डीएनए खराब होने की भी बात कही है। साथ ही भविष्य के लिए डरावने संकेत दिए हैं। डॉक्टर ने यह भी दावा किया इससे पुरुषों में बांझपन भी हो रहा है। जो आने वाले समय में जनसंख्या पर भी खासा असर डाल सकता है। कई परिवारों में नई पीढ़ियों के जन्म न लेने का भी अनुमान है।
 
बच्चे के शुरूआती विकास पर पड़ता है असर
डॉ. हर्षदीप कहते हैं कि ड्रग लेने से प्रभावित हुए शुक्राणुओं के डीएनए पर मौजूद रासायनिक संकेत और प्रोटीन में बदलाव देखने को मिलते हैं। इसे एपिजेनेटिक बदलाव कहते हैं। ये संकेत बच्चे के शुरूआती विकास में जीन के काम करने के तरीके को प्रभावित करते है। इससे बच्चे में कई तरह की बीमारियां देखने को मिल सकती हैं। 

नशे पर बात करने से डर रहे लोग
पंजाब में जिस तरह से नशे का विरोध करने पर हत्या की घटनाएं हुईं हैं ऐसे में लोग नशे पर बात करने से डर रहे हैं। अक्तूबर महीने में पंजाब में ऐसे लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी जो नशे के खिलाफ आवाज उठा रहे थे।

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