परिवार के लिए नौकरी और गलत तरीके से भर्ती कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर पिछले लंबे समय से संघर्ष कर रहे बैराज विस्थापित संघर्ष समिति के दो बुजुर्ग बुधवार सुबह तड़के माधोपुर में डीसी आवास के सामने बिजली के बंद पड़े टावर पर चढ़ गए। 200 मीटर ऊंचाई पर बुजुर्गों को चढ़े देख प्रशासन की सांसें फूली हैं।
बांध प्रशासन के अलावा सिविल प्रशासन की फायर ब्रिगेड, पुलिस समेत अन्य अधिकारी मौके पर मौजूद हैं। कई बार समझाने के बावजूद बुजुर्ग नीचे उतरने को राजी नहीं हुए। वहीं, नीचे खड़े अन्य बैराज विस्थापितों ने पंजाब सरकार और बांध प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। 200 मीटर ऊंचाई के बिजली टावर पर चढ़े बुजुर्गों में एक 90 वर्षीय सरम सिंह और 86 वर्षीय कुलविंदर सिंह हैं।
बैराज औसत संघर्ष कमेटी जैनी-जुगियाल के प्रधान दयाल सिंह ने बताया कि पिछले 30 वर्षों से वह लोग नौकरी की मांग कर रहे हैं। बांध प्रशासन ने योग्य विस्थापितों को नौकरी देने के बजाय फर्जी लोगों को नौकरी दी। उन्होंने कहा कि जब तक उनको रोजगार नहीं मिलता तब तक उक्त बुजुर्ग टावर से नीचे नहीं उतरेंगे।
30 वर्ष से चल रहा संघर्ष, 10 बार टावरों पर चढ़े
बैराज बांध विस्थापित पिछले 30 वर्षों से रोजगार की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। यह विस्थापित मलिकपुर, डीसी दफ्तर की पानी की टंकी, जुगियाल में चीफ इंजीनियर कार्यालय के सामने बीएसएनएल टावर, पठानकोट सिविल अस्पताल के पास मोबाइल टावर और इस बार माधोपुर के गांव सिंधूरी के बिजली टावर पर चढ़े हैं।
प्रदर्शनकारी 10 बार टावरों पर चढ़े, एक बार डीसी की कार के आगे लेटकर रोष व्यक्त किया। एक बार एक विस्थापित ने खुद को आग भी लगा ली पर पुलिस ने उसे बचा लिया। इस बार प्रदर्शनकारी बुधवार तड़के 4 बजे टावर पर चढ़ गए। वह फोन कर अपने पारिवारिक सदस्यों को भी सूचित कर रहे हैं कि जब तक प्रशासन उनके पारिवारिक सदस्यों को रोजगार देने की मांग पूरी नहीं करता, तब तक वह नीचे नहीं उतरेंगे।
फर्जी लोगों को दी गईं नौकरियां
प्रधान बैराज औसती संघर्ष कमेटी प्रधान दयाल सिंह ने बताया कि उनकी जमीन बैराज बांध में अधिगृहित हुई है। सरकार ने त्वरित एक सदस्य को नौकरी देने का वादा किया था। सरकार ने नौकरियां दी पर अधिकारियों ने मिलीभगत कर 1-1 मरले जमीन वाले लोगों को नौकरियां दिलवा दीं। जिन लोगों की अधिक जमीन अधिगृहित हुई उन्हें नौकरी नहीं मिली।
पिछले 30 साल से उनके साथ कोई इंसाफ नहीं हो रहा। इन दौरान 500 से अधिक धरने लगाए। उन्होंने बताया कि 31 मई 2019 को एसडीएम धार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि 50 लोगों ने गलत ढंग से रोजगार हासिल किया है। डीसी को भेजी रिपोर्ट पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि लंबे अरसे से केवल आश्वासन मिल रहा है। सुनवाई नहीं होने से नाराज बुजुर्गों ने यह कदम उठाया है।