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Chandigarh: आजाद हिंद फौज ने आजादी के संघर्ष में कई यातनाएं झेलीं, परिवार को 38 साल में पक्की छत तक नहीं मिली

Tue, 15 Aug 2023 10:10 AM IST
नवीन दलाल रिशु राज सिंह, चंडीगढ़

सार

आजाद हिंद फौज के सिपाही सज्जन सिंह की पत्नी को 1985 में तत्कालीन राज्यपाल अर्जुन सिंह ने सम्मानित किया था। उस समय सरकार ने पक्की छत देने का वादा किया था लेकिन परिवार वादे के 38 साल बाद भी पक्की छत के इंतजार में है। जिसके कारण परिवार की सरकार के प्रति नाराजगी है।
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सिपाही सज्जन सिंह - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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देश की आजादी के लिए कई तरह की शारीरिक यातनाएं झेलने वाले स्वतंत्रता सेनानी सज्जन सिंह का परिवार वादे के 38 साल बाद भी पक्की छत के इंतजार में है। सज्जन सिंह 18 साल की उम्र में आजाद हिंद फौज में शामिल हुए। इसके बाद भारतीय सेना में सेवा दी। उन्होंने आईटीआई पटियाला, अमृतसर और चंडीगढ़ में बतौर ग्रुप इंस्ट्रक्टर छात्रों को पढ़ाया भी। देश के लिए सबकुछ किया, लेकिन सरकार आज भी उनके परिवार के लिए उदासीन बनी हुई है।

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1935 को सज्जन सिंह आजाद हिंद फौज में शामिल हुए
18 दिसंबर 1917 को करनाल के बला गांव में एक हिंदू जाट परिवार में स्वतंत्रता सेनानी सज्जन सिंह मान का जन्म हुआ। वह बचपन से ही क्रांतिकारी थे। 18 साल की उम्र में एक अप्रैल 1935 को सज्जन सिंह आजाद हिंद फौज में शामिल हो गए। कैंबवाला में रहने वाले सज्जन सिंह के पोते रोहित कुमार मान ने बताया कि उनके दादा देश को इतना प्यार करते थे कि उन्होंने अपनी सारी जमीन बेच दी और उससे जो पैसे मिले वह आजाद हिंद फौज को दे दिया।

सज्जन सिंह आजाद हिंद फौज में काफी सक्रिय थे, उनके काम से खुश होकर सुभाष चंद्र बोस ने उन्हें हिंदू पुत्र कहकर भी पुकारा था। 1935-40 तक काफी संघर्ष किया। 1941-42 तक जेल में रहे। कई तरह की शारीरिक यातनाएं झेलीं। उन्हें पारा तक पिला दिया गया, जिसे तबीयत काफी खराब हो गई थी।
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10 साल तक उन्होंने आजाद हिंद फौज की सेवा की। इसके बाद वर्ष 1945 में उन्हें भारतीय सेना में नौकरी मिल गई। सज्जन सिंह ने सिर्फ सेना की ही सेवा नहीं की, बल्कि उन्होंने आईआईटी पटियाला, अमृतसर और चंडीगढ़ के सेक्टर-28 स्थित आईटीआई में भी बतौर ग्रुप इंस्ट्रक्टर काम किया। उनकी आखिरी पोस्टिंग भी चंडीगढ़ में ही थी।

सज्जन सिंह की मौत भी है एक पहेली
सज्जन सिंह के पोते रोहित कुमार मान बताते हैं कि उनके दादाजी की मृत्यु कसौली में हुई थी। वर्ष 1972 में ड्यूटी के दौरान ही उनकी गाड़ी खाई में मिली थी। इसके बाद से दो तरह की बातें कही जाती हैं। कुछ लोग कहते हैं कि सज्जन सिंह को हार्ट अटैक आया था, जिसके बाद उनकी मृत्यु हुई। दूसरी तरफ कुछ लोगों का कहना है कि उनकी गाड़ी का ब्रेक फेल हो गया था, जिसकी वजह से वह खाई में गिर गए और मृत्यु हो गई।

रोहित कुमार मान ने बताया कि अब तक उन्हें भी सच्चाई नहीं पता है कि उनके दादाजी की मृत्यु कैसे हुई थी। इसलिए वह दस्तावेजों को लेने के लिए जल्द ही कसौली भी जाने वाले हैं। उन्होंने बताया कि जिस दौरान सज्जन सिंह की मौत हुई, वह कसौली आर्मी हेडक्वार्टर में गए थे।

जीवनभर किराए पर रहा परिवार, पता लगा तो राज्यपाल ने घर देने का किया वादा
सज्जन सिंह का एक बेटा है, जिनका नाम विनोद कुमार है। विनोद कुमार ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं थे। वह सीसीए कॉलेज में बतौर पिअन सेवानिवृत्त हुए। ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं होने की वजह से उन्होंने कभी पिता के स्वतंत्रता सेनानी होने से मिलने वाले लाभ नहीं उठाए। अब विनोद कुमार का आधा शरीर पोलियो से ग्रस्त और पैर मुड़ा हुआ है। चल भी नहीं पाते हैं। शुरू से ही परिवार किराए पर रहा है।

वर्तमान में वह कैंबवाला में रहते हैं। रोहित कुमार ने बताया कि वर्ष 1985 में पंजाब राजभवन में तत्कालीन राज्यपाल अर्जुन सिंह ने उनकी दादी वीणा कुमारी को शाल और ताम्रपत्र देकर सम्मानित किया था, जो आज भी सहेज कर रखा है। राज्यपाल को किराये पर रहने की बात पता चली तो उन्होंने घर देने का वादा किया था, लेकिन 38 साल बाद भी वादा अधूरा है। उन्होंने 2019 में सरकार के वादे को याद दिलाया। कई अधिकारियों के सामने गुहार लगा चुके हैं लेकिन अब तक उनके हाथ खाली है।

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