तरनतारन। स्टेट स्पेशल ऑपरेशन सेल (एसएसओसी) की टीम की ओर से दो हैंड ग्रेनेड और दो पिस्टल समेत अमृतसर में गिरफ्तार किए गए रणजीत सिंह राणा सोहल के मोबाइल कॉल की आखिरी लोकेशन तरनतारन के बोहड़ी चौक में मंगलवार की दोपहर को ट्रेस हुई और वहीं पर बंद हुई थी। गांव में समाज सेवक के तौर पर जाना जाता रणजीत सिंह किस आतंकी संगठन का हिस्सा है, यह पता लगाने लिए स्थानीय पुलिस के साथ खुफिया एजेंसियों जुट गई हैं।
थाना झब्बाल के गांव सोहल निवासी रणजीत सिंह तीन दिन पहले अमृतसर जिले के गांव रामपुर (झीते कलां) में अपने ममेरे भाई की मौत के बाद वहां गया था। गांव सोहल की आबादी 3700 के करीब है। रणजीत सिंह के पिता सरमुख सिंह के पास 15 किल्ले जमीन है। रणजीत सिंह का एक भाई कीर्तन करता है और छोटा भाई बारहवीं का छात्र है। रणजीत की कोई सगी बहन नहीं है। इस कारण परिवार ने रिश्तेदारों की लड़की को गोद ले रखा है। गांव में गरीब लड़कियों के विवाह करने, आंखों के कैंप लगाने, एतिहासिक दिनों पर लंगर लगाने वाला रणजीत सिंह खेमकरण हलके से संबंधित एक चर्चित धार्मिक डेरे से जुड़ा हुआ है। रणजीत सिंह अधिकतर उसी डेरे में रहता है। आम तौर पर निहंग सिंहों के वेश में रहने वाले रणजीत राणा के नाम पर लाइसेंसी राइफल भी है।
‘कौम दे राखे’ ग्रुप में कौन लोग जुड़े, पुलिस कर रही जांच
तरनतारन जिले में आरोपी रणजीत सिंह ने ‘कौम दे राखे’ नाम पर एक ग्रुप भी बना रखा है। इस ग्रुप में और कौन लोग शामिल हैं, इसका पता लगाने लिए खुफिया एजेंसियों द्वारा अपने स्तर पर काम किया जा रहा है। मंगलवार की रात को पुलिस की टुकड़ी ने गांव सोहल में दबिश दी। हालांकि टीम ने राणा के परिवार के किसी भी सदस्य से पूछताछ नहीं की। करीब आधा घंटा गांव में रहने के बाद पुलिस की टीम लौट गई। सब डिवीजन तरनतारन के डीएसपी बरजिदर सिंह कहते हैं कि राणा सोहल के खिलाफ जिले में कोई मुकदमा दर्ज नहीं है। फिर भी रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है।