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मंडियों में चल रहा धान में नमी का खेल : धान की खरीद का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1960, कम मिल रहा दाम

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धान तौलते निजी एजेंसी के कर्मी। - फोटो : AMRITSAR
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अमृतसर। एक तरफ पंजाब सरकार किसानों के आंदोलन में उनके साथ खड़े होने का दम भरती है, तो वहीं दूसरी तरफ मंडियों में पहुंची धान की खरीद को लेकर नमी का खेल चल रहा है। किसानों का कहना है कि इसमें सरकारी अधिकारी और मंडियों के एजेंट मिले हुए हैं, जो धान में नमी होने के झांसे में किसानों को निजी तौर पर फसल बेचने के लिए मजबूर कर रहे हैं। वैसे तो सरकार ने धान की खरीद के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 1960 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। मगर धान में नमी के चक्कर में उन्हें सरकार की तरफ से तय कीमत में से बहुत कम दाम मंडियों में मिल रहे हैं।
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कत्थूनंगल के किसान संतोख सिंह ने भगतांवाला दाना मंडी में बताया कि उन्होंने अपनी धान 1650 रुपये प्रति क्विंटल निजी तौर पर बेची है। इसका कारण पूछे जाने पर किसान ने बताया कि उन्हें कहा गया कि उनकी धान में सरकार की तरफ से तय नमी 16 फीसदी से ज्यादा है, जिसके चलते सरकारी एजेंसी उसका धान नहीं खरीद सकती। किसान ने कहा कि बारिश का खतरा होने के चलते वे नमी के साथ ही धान को मंडी में ले आए हैं।
मूधल नरेंद्र सिंह के किसान ने बताया कि ज्यादातर किसानों की धान में नमी होने की बात कही जा रही है। उनकी धान में भी नमी बताई गई। धान में सरकार की तरफ से तय सीमा से नमी ज्यादा थी तो उन्हें मंडी में निजी एजेंसी को धान बेचनी पड़ी। वैसे तो धान का एमएसपी 1960 है, लेकिन उन्हें मजबूरी में अपनी धान को 1685 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बेचना पड़ा।
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किसानों को धान की सही कीमत मिले, इसके लिए कुछ टीमों की ड्यूटी लगाई गई है। जो मंडियों में घूमती रहती हैं। इसके अलावा निजी तौर पर हो रही धान की खरीद पर नजर रखी जा रही है। 17 फीसदी नमी तक की धान सरकार की एजेंसियां खरीदती हैं, जबकि इससे ज्यादा नमी होने पर खरीद नहीं होती है। अधिकारियों के एजेंटों से मिलने होने का आरोप गलत है। -अमनदीप सिंह, जिला मैनेजर, मार्केट कमेटी अमृतसर।
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