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Attari-Wagah border: भारत ने तीन पाकिस्तानी कैदियों को किया रिहा, 110 लोगों का जत्था भी अपने वतन लौटा

संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Mon, 23 May 2022 07:00 PM IST

सार

पाकिस्तान के 110 नागरिकों का एक जत्था सोमवार को अटारी-वाघा सीमा के रास्ते अपने वतन लौट गया। इस जत्थे के सदस्य सोमवार सुबह दिल्ली से रेल के जरिये अमृतसर पहुंचे और वहां से उन्हें भारी सुरक्षा के बीच अटारी सीमा तक ले जाया गया।
अपने वतन जाते पाकिस्तानी कैदी।
अपने वतन जाते पाकिस्तानी कैदी। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

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अमृतसर की फताहपुर जेल में बंद तीन पाकिस्तानी नागरिक रिहाई के बाद सोमवार को अटारी-वाघा सीमा के रास्ते अपने वतन लौट चुके हैं। फिरोजपुर सेक्टर से गिरफ्तार तीनों पाकिस्तानी नागरिकों को अदालत ने डेढ़ से तीन साल तक की सजा सुनाई थी। सजा पूरी होने के बाद पुलिस की टीम उन्हें अटारी स्थित ज्वाइंट चेक पोस्ट (जेसीपी) पहुंची थी।
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रिहा होने वालों में मोहम्मद सैफ पुत्र इलाही बख्श निवासी उकारा, मोहम्मद लतीफ पुत्र मुशक अली निवासी उकारा और अदनान अली पुत्र मंसा निवासी कसूर पाकिस्तान का नाम शामिल है। बीएसएफ ने फिरोजपुर सेक्टर में इन्हें अलग-अलग समय में गैर-कानूनी तौर पर भारत में प्रवेश करने पर काबू कर पुलिस के हवाले किया था। सजा मुकम्मल होने पर सोमवार को फिरोजपुर प्रशासन और पुलिस की टीम इन्हें फताहपुर जेल से अटारी बॉर्डर लेकर पहुंची। जहां कस्टम और इमीग्रेशन के बाद बीएसएफ अधिकारियों ने इन्हें पाक रेंजर्स के हवाले कर दिया।


110 पाक नागरिकों का जत्था अटारी के रास्ते वतन लौटा
उधर, पाकिस्तान के 110 नागरिकों का एक जत्था सोमवार को अटारी-वाघा सीमा के रास्ते अपने वतन लौट गया। इस जत्थे के सदस्य सोमवार सुबह दिल्ली से रेल के जरिये अमृतसर पहुंचे और वहां से उन्हें भारी सुरक्षा के बीच अटारी सीमा तक ले जाया गया। एसएसपी देहात स्वर्णदीप सिंह ने पाकिस्तान के इस जत्थे के लिए विशेष सुरक्षा बंदोबस्त करने का आदेश दिया था।  

बता दें कि इस जत्थे के सदस्य डिप्टी सेक्रेटरी इमरान के नेतृत्व में 16 मई 2022 को वाघा-अटारी सीमा के रास्ते भारत पहुंचे थे। यहां से यह दिल्ली रवाना हो गए। जहां सभी ने हजरत अमीर खुसरो उर्स में हिस्सा लिया। उर्स संपन्न होने के बाद रविवार रात ही ट्रेन के जरिये अमृतसर के लिए रवाना हो गए और सोमवार सुबह अमृतसर रेलवे स्टेशन पहुंचे। वहां से अटारी पहुंचने के बाद प्रोटोकॉल अधिकारी अरुण माहल ने इनकी कस्टम और इमीग्रेशन में मदद की। जेसीपी अटारी पर सभी औपचारिकताएं मुकम्मल होने के बाद तीन बसों में इन्हें भारी सुरक्षा के बीच अटारी सीमा तक लाया गया। जहां से यह जीरो लाइन पार करने के बाद अपने वतन लौटे।
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