बटाला। पंजाब के पूर्व मंत्री और पंजाब की राजनीति में अलग पैठ रखने वाले जत्थेदार सेवा सिंह सेखवां का वीरवार को उनके पैतृक गांव सेखवां में पूरे सरकारी सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। सेखवां लंबे समय से बीमार चल रहे थे और बुधवार को रात उन्होंने चंडीगढ़ के एक निजी अस्पताल में आखिरी सांस ली।
सेवा सिंह सेखवां की मौत के बाद पूरा सेखवां गांव शोक में डूबा है। वहीं वीरवार को सरकारी सम्मान के साथ पंजाब पुलिस की टुकड़ी ने सलामी देते हुए राइफलों को ऊपर उठाकर हवाई फायर किए। सेखवां के पार्थिव शरीर को उनके बेटे जगरूप सिंह सेखवां ने मुखाग्नि दी। इस मौके पर आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता भी पहुंचे। वहीं गुरदासपुर के डीसी मोहम्मद इश्फाक, अकाली नेता रविकरण सिंह काहलों, भाजपा नेता मास्टर मोहन लाल और भूपिंदर सिंह मान भी पहुंचे और दुख व्यक्त किया।
इस मौके पर गांव वालों का कहना था कि जत्थेदार सेवा सिंह सेखवां के कारण ही पूरे भारत में धार्मिक, राजनीतिक और सामाजिक तौर पर उनके गांव का नाम प्रसिद्ध हुआ है। गांव वालों का कहना था कि सेवा सिंह सेखवां केवल राजनीतिक क्षेत्र में ही सक्रिय नहीं थे, बल्कि धार्मिक क्षेत्र में भी पूर्ण ज्ञान रखते थे।
केजरीवाल की अंगुली थमाकर गए पिता
इस मौके पर स्वर्गीय सेवा सिंह सेखवां के बेटे जगरूप सिंह सेखवां ने कहा कि उनके पिता सेवा सिंह सेखवां ने अंतिम समय में उन्हें कहा था कि उन्होंने उनको (जगरूप सेखवां को) अरविंद केजरीवाल की अंगुली थमा दी है। केजरीवाल बहुत ईमानदार व्यक्ति हैं, सदा उनका साथ देना। पार्टी के साथ-साथ पंथक कार्यों में भी हिस्सा लेना है। अपनी पारिवारिक विरासत को संभाल कर रखना। जगरूप सिंह सेखवां ने बताया कि बुधवार को जब उनके पिता सेवा सिंह सेखवां का देहांत हुआ तो प्रकाश सिंह बादल का उन्हें फोन आया और उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए उन्हें सांत्वना दी। इसके अलावा अन्य राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं ने भी पिता की मौत पर दुख व्यक्त किया है।
सेवा सिंह सेखवां का शिक्षक से दिग्गज राजनेता बनने का सफर
जत्थेदार सेवा सिंह सेखवां सिंह को राजनीति विरासत में मिली थी। सेखवां के पिता उजागर सिंह सेखवां पुराने टकसाली नेता थे और वे भी दो बार विधायक बने थे। अपने पिता उजागर सिंह सेखवां के देहांत के बाद शिक्षक रह चुके सेवा सिंह सेखवां ने अपने पिता की राजनीतिक विरासत को संभालते हुए 1990 में सियासी मैदान में उतरे। उस समय पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल सेवा सिंह सेखवां को राजनीति में लेकर आए थे। सेवा सिंह पहली बार 1997 में शिरोमणि अकाली दल से हलका काहनूवान से चुनाव लड़कर विधायक बने।
सेवा सिंह बादल सरकार के समय शिक्षा मंत्री, लोक संपर्क और मॉल विभाग के मंत्री भी रहे। इसके अलावा शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सदस्य भी रहे। 2017 में बादल सरकार की हार के बाद सेवा सिंह सेखवां शिअद के उन नेताओं में शामिल हो गए जो उस समय सुखबीर बादल के कामकाज की शैली पर सवाल उठा रहे थे। इसके बाद पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोपों के तहत शिरोमणि अकाली दल ने सेखवां को पार्टी से निष्कासित कर दिया। शिअद छोड़ने के बाद सेखवां ने रतन सिंह अजनाला और रंजीत सिंह ब्रह्मपुरा के साथ मिलकर शिरोमणि अकाली दल टकसाली का गठन किया।
इसके बाद अकाली दल संयुक्त से जुड़ने के बाद अकाली दल संयुक्त को भी छोड़ दिया। आखिर में सेवा सिंह सेखवां अपने बेटे जगरूप सिंह सेखवां के साथ 26 अगस्त 2021 को आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए। आप में शामिल करने के लिए गांव सेखवां में बाकायदा आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल खुद पहुंचे और सेखवां को पार्टी में शामिल किया था।