वाराणसी में ऐतिहासिक इमारतों का चेहरा बदल रहा है। इन्हें संरक्षित करने की मुहिम रंग ला रही है। कभी टूटे झरोखे, जर्जर दीवारें और ऊंचे दरख्तों से खंडहर सी दिखने वाली धरोहर अब अपने पुराने स्वरूप में लौट आई है। काशी की कला, संस्कृति, परंपरा के स्वर्णिम इतिहास से रूबरू कराने लगी है। आने वाली पीढ़ियां अब इन भवनों के जरिए अपने इतिहास को देख और समझ सकेंगी।
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्याल, सारनाथ स्थित पुरातात्विक धरोहर हो या गुरुधाम मंदिर और यहां की पक्का महाल की गलियां। ये अपने अंदर काशी की इतिहास को पुरा वैभव को अपने में समेटे हुए हैं। घाट, गली, मोहल्ले से लेकर सारनाथ तक और मंदिर से लेकर मकबरे तक, काशी को महादेव का ऐसा आशीर्वाद मिला है कि पूरी नगरी ही धरोहर है। विश्व धरोहर दिवस पर पेश है वाराणसी की इन्हीं धरोहरों पर आधारित रिपोर्ट।