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World Heritage Day: संवरी विरासत तो दिखा काशी का स्वर्णिम इतिहास, आने वाली पीढ़ियां भी प्राचीन धरोहरों से होंगी रूबरू

Mon, 18 Apr 2022 11:28 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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विश्व धरोहर दिवस पर विशेष - फोटो : अमर उजाला
वाराणसी में  ऐतिहासिक इमारतों का चेहरा बदल रहा है। इन्हें संरक्षित करने की मुहिम रंग ला रही है। कभी टूटे झरोखे, जर्जर दीवारें और ऊंचे दरख्तों से खंडहर सी दिखने वाली धरोहर अब अपने पुराने स्वरूप में लौट आई है। काशी की कला, संस्कृति, परंपरा के स्वर्णिम इतिहास से रूबरू कराने लगी है। आने वाली पीढ़ियां अब इन भवनों के जरिए अपने इतिहास को देख और समझ सकेंगी।

संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्याल, सारनाथ स्थित पुरातात्विक धरोहर हो या गुरुधाम मंदिर और यहां की पक्का महाल की गलियां। ये अपने अंदर काशी की इतिहास को पुरा वैभव को अपने में समेटे हुए हैं। घाट, गली, मोहल्ले से लेकर सारनाथ तक और मंदिर से लेकर मकबरे तक, काशी को महादेव का ऐसा आशीर्वाद मिला है कि पूरी नगरी ही धरोहर है। विश्व धरोहर दिवस पर पेश है वाराणसी की इन्हीं धरोहरों पर आधारित रिपोर्ट।
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तंत्र साधना का अहम केंद्र है गुरुधाम मंदिर

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गुरुधाम मंदिर - फोटो : अमर उजाला
काशी के भेलूपुर क्षेत्र में स्थित है गुरुधाम मंदिर। ये मंदिर 200 वर्ष पुराना है, इसका निर्माण 1814 में महाराजा जय नारायण घोषाल ने कराया था। यह तंत्र साधना का अहम केंद्र रहा है। यहां कभी गुरु से ईश्वर की प्राप्ति और ईश्वर से योग यानी शून्य की प्राप्ति कर लोग जीवन से मुक्ति पाते थे।
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गुरुधाम मंदिर - फोटो : अमर उजाला
गुरुधाम मंदिर देश का पहला अनोखा शून्य मंदिर है, जिसमें अष्टकोण है। जानकारी और संरक्षण के अभाव में इस मंदिर के कुछ हिस्से खंडित हो गए। लेकिन वर्तमान में संस्कृति मंत्रालय द्वारा इसके मूल स्वरूप सुरक्षित और संरक्षित करने का प्रयास जारी है। 

भगवान बुद्ध की तपोभूमि है सारनाथ

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sarnath - फोटो : istock
सारनाथ भारत की ऐतिहासिक विरासत का जीता जागता उदाहरण है। भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना प्रथम उपदेश यहीं दिया था। इतिहास के पन्नों मेें सारनाथ का प्राचीन नाम ऋषिपतन हिरनों का जंगल था। सारनाथ का मूलगंध कूटी गौतम बुद्ध का मंदिर है।
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सारनाथ चौखंडी स्तूप - फोटो : अमर उजाला
सातवीं शताब्दी में भारत आए चीनी यात्री ने इसका वर्णन भी किया है। बौद्ध समुदाय के लिए चौखंडी स्तूप पूजनीय है। यहां गौतम बुद्ध से जुड़ी कई निशानियां है, माना जाता है कि चौखंडी स्तूप का निर्माण मूलरूप से सीढ़ीदार मंदिर के रूप में किया गया था। 
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पयर्टन का केंद्र बनेगा संस्कृत विश्वविद्यालय

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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय - फोटो : अमर उजाला
230 साल की धरोहर व ज्ञान समेटे संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर को अब पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। प्राच्य विद्या के संरक्षण व संवर्द्धन के लिए विश्वविद्यालय की स्थापना 1791 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने बनारस संस्कृत पाठशाला के रूप में की थी। इसके बाद 1848 में मुख्य भवन की नींव पड़ी और अंग्रेजी वास्तुविद मेजर किट्टो की देखरेख में भवन 1852 में बनकर तैयार हुआ। 
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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय - फोटो : अमर उजाला
ग्राथिक शैली में बने इस भवन में संस्कृत विश्वविद्यालय की कक्षाएं चलती थीं। कभी इस संस्था ने भारत ही नहीं नेपाल, ढाका, कराची, लाहौर, गांधार प्रदेश तक की संस्कृत पाठशालाएं जुड़ी थीं।
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