कला और संस्कृति की नगरी वाराणसी में सैंकड़ों वर्षों से लगातार हो रही विश्व प्रसिद्ध अद्भुत नाग नथैया लीला का आयोजन आज किया जाएगा। गंगा की मध्यधारा पर यह अनूठी कृष्ण लीला देश-दुनिया के पर्यटकों, श्रद्धालुओं के लिए यादगार होगी। इस लीला को देखने के लिए देश कोने-कोने से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी सैलानी यहां पहुंचते हैं। आगे की स्लाइड्स में देखें..
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- फोटो : अमर उजाला
काशी का यह चौथा और आखिरी आध्यात्मिक लक्खा मेला 23 अक्तूबर की शाम पांच बजे से गंगा की मध्यधारा पर लगेगा। गंगा में कुछ देर के लिए यमुना की झलक पेश की जाएगी। चलायमान लीलाओं, आध्यात्मिक मेलों और लोकोत्सवों के लिए विख्यात तीर्थनगरी में गंगा की मध्यधारा पर अनूठी कृष्ण लीला होगी।
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तुलसी घाट पर गंगा की धारा में यमुनारूपी कालिय दह बनेगा। गोप-गोपियों के साथ खेलते समय सोने की गेंद दह में गिरेगी और उसे निकालने के लिए कान्हा कदंब की डाल से छलांग लगाएंगे। नाग नथैया की लीला के लिए तुलसी घाट पर तैयारियां अंतिम दौर में हैं। अस्सी-भदैनी के मल्लाह कान्हा की टोली में शामिल होंगे।
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कला और संस्कृति की नगरी वाराणसी में ये परंपरा 450 वर्ष पुरानी है जो कि कार्तिक मास की नाग चतुर्थी को हर साल यहां होती है। नाग नथैया का ये मेला गोस्वामी तुलसी दास जी के द्वारा शुरू किया गया था, तभी से ये लीला तुलसी घाट पर होती चली आ रही है।
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काशिराज डॉ. अनंत नारायण सिंह शाही वेश में बजड़े पर सवार होकर नाग नथैया लीला के साक्षी बनेंगे। कदंब की डाल से यमुनादह में गेंद खोजने के लिए कान्हा कूदेंगे और कुछ देर में ही कालियानाग के फन पर बंशी बजाते हुए बाहर प्रगट हो जाएंगे। शंखध्वनि, डमरूनाद के साथ पीपे के मंचों से कान्हा की आरती होगी।
संकट मोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र के निर्देशन में कृष्ण लीला की यह अद्भुत छटा पेश की जाएगी। इस लीला के देखने के लिए दुनिया के कई देशों से पर्यटक काशी पहुंच रहे हैं।