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वाराणसी: हर घंटे तीन सेमी बढ़ रहा गंगा का जलस्तर, घाटों की डूबने लगीं सीढ़ियां, वरुणा पार रहने वालों की बढ़ रही मुश्किलें

Sat, 31 Jul 2021 02:02 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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शीतला घाट पर डूब रहीं सीढ़ियां। - फोटो : अमर उजाला
वाराणसी में गंगा का जलस्तर तीन सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ता जा रहा है। इससे जिला प्रशासन भी सतर्क हो गया है। घाटों की सीढ़ियां भी डूबने लगी हैं। वहीं, जिला प्रशासन ने कहा है कि घाट पर स्नान करने वाले लोग बेहद सावधानी बरतें। हर दिन हो रही जमकर बारिश से लगातार गंगा का जलस्तर बढ़ रहा है। 

पहाड़ी और मैदानी इलाकों में बारिश से वाराणसी में गंगा के जलस्तर में बढ़ाव तेज हो गया है। गंगा के जलस्तर में प्रयागराज से बलिया तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, वाराणसी में शनिवार की सुबह 8:00 बजे तक गंगा का जलस्तर 63.40 मीटर पर था जो सामान्य जल स्तर 66.599 मीटर से नीचे है। शुक्रवार की रात आठ बजे गंगा का जलस्तर 63.08 मीटर दर्ज किया गया। गंगा के जलस्तर में शुक्रवार दोपहर तक बढ़ाव की रफ्तार 8 सेंमी प्रति घंटा थी। वहीं शाम से गंगा की रफ्तार आधी हो गई। देखें अगली स्लाइड्स...।
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शीतला घाट की सीढ़ियां भी गंगा के जलस्तर बढ़ने से पानी में समा रही हैं। वाराणसी में गंगा जलस्तर का चेतावनी बिंदु 70.26 मीटर है। गंगा का जलस्तर बढ़ने की वजह से अस्सी से राजघाट के किनारे स्थित छोटे मंदिर और मढ़ियां पानी में समा गए हैं। गंगा को घाट की सीढ़ियों की ओर बढ़ता देख तीर्थ पुरोहितों और माझियों ने अपना सामान सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना शुरू कर दिया है।
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बड़ी नावों को घाटों पर लगे पोलों और भवनों की कड़ियों से बांध दिया गया है। छोटी नावों को घाट के ऊपरी हिस्से की ओर ले जाने का काम शुरू कर दिया गया है। मांझियों का कहना है कि कोरोना की दूसरी लहर का असर खत्म होने के बाद किसी तरह से गंगा में नौकायन शुरू हुआ तो अब बाढ़ आ गई।

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शुक्रवार को सुबह गंगा के जलस्तर में दो मीटर से ज्यादा का बढ़ाव दर्ज किया गया। सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर 62.52 मीटर था जबकि गुरुवार की सुबह गंगा का जलस्तर 60.48 मीटर था। पिछले 24 घंटे में गंगा के जलस्तर में प्रति घंटे आठ सेंटीमीटर की रफ्तार से बढ़ोतरी थी। हालत यह है कि गंगा अब सीढ़ियों पर चढ़ने लगी हैं। उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में हो रही बारिश की वजह से गंगा के जलस्तर में अभी और तेजी से बढ़ोतरी होगी।
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नहर की पटरी गंगा में बही।
गंगा पार बनाई गई रेत की नहर समा रही
वाराणसी में गंगा पार विशाल रेत के मैदान के बीचों-बीच करीब साढ़े पांच किलोमीटर लंबी रेत की नहर बनाई गई थी। इसका निर्माण प्रोजेक्ट कारपोरेशन की देखरेख में कराया गया  था। परियोजना के प्रबंधक पंकज वर्मा के मुताबिक 1195 लाख लागत से करीब 5.3 किमी लंबी और 45 मीटर चौड़ी नहर बनाई गई है। गंगा पार रेती पर बालू की नहर के पूर्वी छोर पर रेत के ढूहे खड़े किए गए। रामनगर स्थित पुल के पास से बालू में निकाली गई नहर का आखिरी सिरा राजघाट पुल के करीब गंगा में मिलाया गया है। बताया गया था कि नहर और गंगा के बीच बालू पर आईलैंड बनाया जाएगा, जिसका लुत्फ पर्यटक उठा सकेंगे। लेकिन, अब नहर धीरे-धीरे गंगा में समाहित हो रही है।
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वरुणा किनारे रहने वाले परेशान
गंगा का जलस्तर बढ़ने से वरुणा तटवासियों में खलबली मचनी शुरू हो गई है। कोनिया, नक्खी घाट, ऊंचवा, सिंधवा घाट सहित आसपास के अन्य इलाकों के 350 से ज्यादा भवन बाढ़ के पानी से घिर सकते हैं। गंगा का जलस्तर तकरीबन 2 मीटर और बढ़ेगा तो उनकी मुश्किलों का सिलसिला बढ़ जाएगा। 
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