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वाराणसी: गंगा पार 1195 लाख से बनाई गई रेत की नहर समा रही पानी में, चेतावनी के बाद भी हुआ था निर्माण

Sat, 31 Jul 2021 08:46 AM IST
हरि User न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़ा। - फोटो : अमर उजाला
वाराणसी में गंगा पार रेती में लाखों रुपये की लागत से बनी नहर गंगा के पानी में समा रही है। शुक्रवार को नहर का अधिकांश हिस्सा धीरे-धीरे समाहित हो गया। गंगा के जलस्तर में बढ़ाव जारी रहा तो 1195 लाख रुपये की लागत वाली नहर पूरी तरह समाहित हो जाएगी। काशी के नदी विज्ञानियों ने नहर निर्माण से पहले ही ऐसी आशंका जताई थी।
गंगा पार विशाल रेत के मैदान के बीचों-बीच करीब साढ़े पांच किलोमीटर लंबी रेत की नहर बनाई गई थी। इसका निर्माण प्रोजेक्ट कारपोरेशन की देखरेख में कराया गया  था। परियोजना के प्रबंधक पंकज वर्मा के मुताबिक 1195 लाख लागत से करीब 5.3 किमी लंबी और 45 मीटर चौड़ी नहर बनाई गई है। गंगा पार रेती पर बालू की नहर के पूर्वी छोर पर रेत के ढूहे खड़े किए गए। रामनगर स्थित पुल के पास से बालू में निकाली गई नहर का आखिरी सिरा राजघाट पुल के करीब गंगा में मिलाया गया है। अगली स्लाइड्स में भी देखें...।
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गंगा में समा रही नहर। - फोटो : अमर उजाला
बताया गया था कि नहर और गंगा के बीच बालू पर आईलैंड बनाया जाएगा, जिसका लुत्फ पर्यटक उठा सकेंगे। लेकिन, अब नहर धीरे-धीरे गंगा में समाहित हो रही है। संकट मोचन फाउंडेशन के अध्यक्ष व आईआईटी बीएचयू के प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र ने नहर निर्माण के दौरान कहा था कि इससे डाउनस्ट्रीम में कटान बढ़ेगी।  पश्चिम में सिल्ट का जमाव होगा। नहर बाढ़ में समाहित हो जाएगी। लेकिन जिला प्रशासन ने उनकी बातों को अनदेखा कर दिया। नदी विज्ञानी प्रो. यूके चौधरी ने भी नहर निर्माण पर सवाल उठाते हुए पीएम और सीएम को भी पत्र लिखा था। 
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गंगा में समा रही नहर। - फोटो : अमर उजाला
नदी विशेषज्ञ ने दर्ज कराई थी शिकायत
बीएचयू के नदी विशेषज्ञ प्रो. यूके चौधरी ने नहर परियोजना पर सवाल खड़ा करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम योगी आदित्यनाथ को खत भेजा था। प्रो. चौधरी ने सवाल किया था कि रेत पर नहर में डिस्चार्ज की गणना कैसे की गई? क्रॉस सेक्शन और ढलान कैसे तय हुआ? रेत में रिसाव की दर की गणना कैसे की गई? उन्होंने दावा किया था कि नहर निर्माण के कारण गंगा घाटों से भी दूर हो जाएगी। 

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नहर की पटरी गंगा में बही। - फोटो : अमर उजाला
कम हो जाएगा गंगा का वेग
प्रो. यूके चौधरी ने बताया कि नहर बाढ़ के पानी की गति को नहीं झेल पाएगी, क्योंकि यह बगैर वैज्ञानिक सिद्धांतों के बनाई गई है। नहर बनने के बाद गंगा में पानी की गहराई कम होने लगेगी। इसके चलते वेग में कमी आएगी। तब गंगा घाटों के किनारे बड़े पैमाने पर गाद जमा होगी। इससे गंगा घाटों को छोड़ देगी। ललिता घाट पर निर्माणाधीन दीवार के कारण अभी से घाटों का प्रवाह कम हो गया है।
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गंगा का जलस्तर बढ़ा। - फोटो : अमर उजाला
मानक के अनुसार डिजाइन नहीं 
प्रो. चौधरी ने बताया कि गंगा पार रेती पर बनने वाली नहर की डिजाइन भी मानक के मुताबिक नहीं है। बालू क्षेत्र में नहर का डिस्चार्ज और स्लोप कितना है इसकी जानकारी किसी को नहीं दी गई। गंगा के सात किलोमीटर के दायरे में तीन तरह का बालू मिलता है।  
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गंगा का जलस्तर। - फोटो : अमर उजाला
दावा था गंगा को पुनर्जीवित करने के लिए बनाई है नहर
शासन-प्रशासन का दावा था कि नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत गंगा को पुनर्जीवन देने के लिए नहर बनाई जा रही है और बालू की निकासी कराई जा रही है। गंगा की तलहटी की सफाई कर जलीय जीवों के अलावा परिवहन के नजरिए से इसे उपयोगी बनाया जा रहा है। कार्यदायी संस्था के सहायक परियोजना अधिकारी दिलीप कुमार ने दावा किया था कि नहर के बनने से गंगा नदी का मूल स्वरूप नहीं बिगड़ेगा। घाट के पत्थरों के नीचे का हिस्सा पोपला हो गया है। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए सिंचाई विभाग और विशेषज्ञों की सलाह पर गंगा पार रेती में नहर बनाने की योजना बनी है।  
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