वाराणसी में निर्माणाधीन चौकाघाट-लहरतारा फ्लाईओवर की दो बीम गिरने के कारण 15 लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। बता दें कि शनिवार को पुलिस ने इस मामले में ढाई महीने बाद आठ लोगों को गिरफ्तार कर जेल भी भेज दिया है। सेतु निगम के बड़े पदों पर आसीन सात अधिकारियों की गिरफ्तारी से पीड़ित परिवारों को न्याय मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। खुलासे के मुताबिक, दस अहम खामियों की वजह से 15 लोगों की मौत हुई थी। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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- फोटो : अमर उजाला
वाराणसी चौकाघाट-लहरतारा फ्लाईओवर हादसे से पहले पिलर नंबर 79 व 80 के बीच बीम जी 3 की लोअरिंग का काम यानी उन्हें नियत स्थान पर फिक्स करने के दौरान पैदा हुआ कंपन हादसे की अहम वजह बना। इसी दौरान जी 3 और जी 4 के बीच लगी सरिया सपोर्ट दिए बगैर काट दी गई थी। इसके बाद बीम जी 4 और जी 5 को कोई अतिरिक्त सपोर्ट नहीं दिया गया।
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साथ ही, पिलर नंबर 79 व 80 के बीच पांच बीम रखने के दौरान तीन तरह की मिश्रित तकनीक का उपयोग किया गया, यह पूरी तरह से गलत था। बीम जीरो डिग्री बैलेंस पर होनी चाहिए थी लेकिन जी 4 और जी 5 के साथ ऐसा नहीं था। ऐसी ही दस अहम खामियों की कीमत 15 लोगों को जान देकर चुकानी पड़ी।
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क्राइम ब्रांच के अनुसार चौकाघाट फ्लाईओवर के निर्माण कार्य की कभी सेफ्टी ऑडिट नहीं कराई गई। इंजीनियरिंग मानकों का कड़ाई से पालन नहीं किया गया। संभावित दुर्घटना का आकलन और उसके अनुसार सुरक्षा का मुकम्मल उपाय ना करने की बजाय सब कुछ भगवान भरोसे चलते रहने देने की सेतु निगम के अधिकारियों की प्रवृत्ति ने हादसे को दावत दी।
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पिलर पर बीम रखे जाने जैसे 55 टन से ज्यादा के लोड ट्रांसफर संबंधी महत्वपूर्ण कार्यों के पहले और बाद में सेतु निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर से लेकर अवर अभियंता तक निरीक्षण नहीं करते थे। सब कुछ मजदूरों हवाले छोड़ दिया गया था। कभी इस बिंदु पर विचार नहीं किया कि बीम रखे जाने जैसे जोखिम भरे काम के दौरान क्या सुरक्षा उपाय किया जाए। रुटीन निरीक्षण भी नहीं किया जाता था।
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मिश्रित तकनीक का रैंडम प्रयोग किया गया यानी इसके अनुसार जब जहां जो मन किया वहां वो कर दिया। यदि अधिकारी निरीक्षण भी करने जाते थे तो सुरक्षा मानकों के प्रति ध्यान नहीं देते थे। इस तरह से सेतु निगम के अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों ने सामूहिक रूप से इंजीनियरिंग और सुरक्षा मानकों की अनदेखी दो बीम के सड़क पर गिरने की अहम वजह बनी।
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15 मई की शाम रेलवे की एईएन कॉलोनी के सामने जब चौकाघाट फ्लाईओवर की दो बीम गिरी तो तकरीबन साढ़े पांच घंटे से ज्यादा समय तक चौतरफा बचाओ और बाहर निकालो का शोर गूंज रहा था। इंग्लिशिया लाइन तिराहा से लहरतारा कैंसर अस्पताल के बीच अफरातफरी की स्थिति थी। इसी बीच एक-एक कर 15 लोगों के शव और 11 घायलों को निकाल कर अस्पताल पहुंचाया गया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या के निरीक्षण करनेे आने के कारण आधी रात बाद तक पुलिस और प्रशासन के आला अधिकारी और सैकड़ों लोगों की भीड़ मौके पर जुटी हुई थी। 16 मई को भी ऐसी ही स्थिति रही और कैंट रेलवे स्टेशन से लहरतारा कैंसर अस्पताल के बीच आवागमन पर प्रतिबंध लग गया था जो अब तक जारी है।