प्राचीन नगरी काशी अनोखे घाट, रहन-सहन और अल्हड़पन के अलावा अपने व्यंजनों के लिए भी विश्वविख्यात है। देश के हो या विदेश के यहां जो भी आया, उसे यहां का सब कुछ भाया। जी हां, खास कर यहां के पान और लस्सी का कोई सानी नहीं है। इनका स्वाद जो एकबार लिया वो मुरीद हो गया। समय के साथ-साथ यहां की खान-पान की परंपरा बदली नहीं लेकिन परिवर्तन को आत्मसात जरूर की। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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- फोटो : अमर उजाला
यही वजह है कि यहां की परंपरागत लस्सी अपने में कई फ्लेवर को समाहित की और देश-विदेश में लोगों के जेहन में राज करने लगी। वैसे तो खाने-पीने के मामले में बनारस की कई चीजें चर्चित हैं। बनारसी पान, बनारसी मलइयो, बनारसी चाट, बनारसी लस्सी और न जाने क्या-क्या..। जिनके दिवाने देश में ही नहीं विदेशों में भी हैं।
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- फोटो : अमर उजाला
जापान से लेकर कनाडा, स्विट्जरलैंड से लेकर स्वीडन तक के लोग बनारसी खान पान के तलबगार हैं। यहां लजीज व्यंजनों का जादू उनके सिर चढ़कर बोलता है।
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बात करें यहां की लस्सी की तो, उसके क्या कहने...। चिलचिलाती धूप हो या फिर कड़ाके की ठंड, लस्सी की दुकानों पर गाहकों की भीड़ कभी कम नहीं होती। खास तौर से विदेशियों की। इन दुकान की लस्सी की खासियत ही यही है कि यहां स्थानीय लोगों या भारतीय पर्यटकों से ज्यादा विदेशियों की भीड़ रहती है। लस्सी की तलब उन्हें इस कदर होती है कि भीड़ होने पर काफी देर तक इंतजार कर लेते हैं। और बगैर लस्सी पीए जाते नहीं हैं...।
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रामनगर की लस्सी के क्या कहने हैं...। दही, रबड़ी और मलाई की मोटी परत से तैयार होने वाली विशेष लस्सी से पेट तो भर जाता है पर मन कभी नहीं भरता। मणिकर्णिका घाट के पास कचौरी गली में स्थित ब्लू लस्सी शॉप की लस्सी दुनिया भर में यूं ही फेमस नहीं है। करीब 70 साल पुरानी लस्सी की इस दुकान में आपको करीब 120 तरह की फ्रूट लस्सियां मिल जाएंगी।
इसमें मिक्स्ड फ्रूट, सैफरन, ड्राई फ्रूट, बनाना, पाइनएप्पल, एप्पल, पिस्ता, चॉकलेट, ऑरेंज जैसे कई फ्लेवर शामिल हैं। इनकी कीमत 10 रुपये से लेकर 110 रुपये तक है। यही वजह है कि यहां आने वाले विदेशी अपने देश वापस लौटकर कुछ करें ना करें लेकिन यहां की लस्सी की तारीफ जरूर करते हैं। यहां की लस्सी विदेशियों को इसलिए भी भाती है क्योंकि यहां स्वाद के साथ उन्हें संतुष्टि भी मिलती है। क्योंकि यहां विदेशी पर्यटकों से लस्सी के दूने दाम नहीं वसूले जाते।