काशी दर्शन को आए जर्मनी के राष्ट्रपति फ्रैंक वॉल्टर स्टाइनमायर को संस्कृति विभाग ने उत्तर प्रदेश की लोक सांस्कृतिक विरासत का गुलदस्ता पेश किया गया। इस दौरान कहीं बुंदेलखंड का पाई डंडा तो कहीं आजमगढ़ का धोबिया नृत्य। घाट पर रामलीला का भावपूर्ण मंचन हुआ तो बीएचयू गेट पर ब्रज का मयूर नृत्य जीवंत हो उठा। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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- फोटो : अमर उजाला
बाबतपुर से लेकर सारनाथ और फिर गंगा आरती के दौरान घाट पर उत्तर प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में प्रचलित लोकलाओं की प्रस्तुति की गई। यह न केवल जर्मनी के राष्ट्रपति और वहां से आए डेलिगेट्स के लिए आकर्षण का केंद्र रहे बल्कि स्थानीय लोगों ने भी इन प्रस्तुतियों को खूब सराहा।
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लाल बहादुर शास्त्री अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा परिसर में रमेश पाल के नेतृत्व में बुंदेलखंड का पाई डंडा पेश किया गया। इसके साथ आजमगढ़ का धोबिया उमेश कनौजिया की टीम ने पेश किया।
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राष्ट्रपति का काफिला जब गिलट बाजार पहुंचा तो कतवारू राम के सहयोगियों ने मादल और पुलिस लाइन में सोना के सहयोगियों ने आदिवासी नृत्य कर्मा से उनका स्वागत किया।
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सारनाथ संग्रहालय के समीप मथुरा की टीम ने खजान सिंह के निर्देशन में मांगलिक अवसरों पर आयोजित होने वाला ‘बम रसिया’ पेश कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद बीएचयू गेट पर ब्रज के प्रसिद्ध मयूर नृत्य ने सभी का मन मोहा जिसमें दिनेश कुमार और सह कलाकार शामिल रहे।
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इसके साथ ही वंदना कुशवाहा की टीम ने राई नृत्य प्रस्तुत किया। शाम को प्रभु घाट पर 108 मौनी बाबा रामलीला कमेटी द्वारा रामलीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। वहीं केदार घाट पर मयूर नृत्य की प्रस्तुति हुई।
अंत में चौसट्टी घाट पर मऊ के रघुवीर यादव की टीम ने पाई डंडा पेश किया। संस्कृति विभाग उत्तर प्रदेश के कार्यक्रम प्रभारी डॉ. लवकुश द्विवेदी ने बताया कि अवध के लोकनृत्य को छोड़ दिया जाए तो हमने प्रदेश की समृद्ध लोककलाओं को जर्मनी के राष्ट्रपति के समक्ष पेश करने की कोशिश की।