शारदीय नवरात्र में आदिशक्ति स्वरूपा की नौ दिवसीय आराधना काशी में आस्था के ऊंचे मानकों पर स्थापित होगी। देशभर में काशी इकलौती नगरी है जहां नौ गौरी और नौ दुर्गा के अलग-अलग धाम नवरात्र में सनातनधर्मियों की श्रद्धा का केंद्र बन जाते हैं। गुरुवार से आरंभ हो रहे शारदीय नवरात्र में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना के साथ की नौ गौरी के पीठों के दर्शन -पूजन के लिए आस्था का सैलाब उमड़ेगा। आगे की स्लाइड्स में देखें नौ दुर्गा दर्शन ..
आश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा यानी गुरुवार को हस्त नक्षत्र में महिषासुर मर्दिनी का आवाहन होगा। अभिमंत्रित गंगा जल से भरे कलशों में सविधि आवाहन के साथ देवी की प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी। मंदिरों में शारदीय नवरात्र की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। कलश स्थापना के साथ जगत जननी जगदंबा की नौ दिवसीय शक्ति आराधना आरंभ होगी।
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नौ दुर्गा दर्शन
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दुर्गा पूजा
शैलपुत्री
प्रथम स्थान देवी शैलपुत्री का है। शास्त्रों के अनुसार देवी शैलपुत्री में काल का नाश करने की क्षमता है। देवी के जन्म के कारण विशाल शैल बने। इसी वजह से उनका नाम शैलपुत्री पड़ा। इनकी आराधना का मुख्य मंत्र है-कालरात्रिम ब्रह्मास्तु वैष्णवी स्कंदमाता, सरस्वती मर्दति दक्ष दुहितरं नमाम: पावनां शिवाम्...। देवी शैलपुत्री का मंदिर वरुणा नदी के किनारे शैलपुत्री मुहल्ले में है। इनके नाम पर ही यह मुहल्ला बसा है।
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maa durga
- फोटो : maa durga
ब्रह्मचारिणी
इस मंत्र से दुर्गा के द्वितीय रूप ब्रह्मचारिणी की आराधना का विधान है। मान्यता है कि देवी हिमवान के घर पुत्री बनकर उत्पन्न हुई थीं। नारद के उपदेशों से प्रभावित होकर उन्होंने भगवान शंकर को प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की। पृथ्वी पर गिरे बेलपत्र खाकर तीन हजार साल व्यतीत किए। बेलपत्र का त्याग भी कर दिया तो भी उनका नाम अर्पणा पड़ गया। काशी में देवी का मंदिर दुर्गाघाट स्थित भवन संख्या 22/1 में प्रतिष्ठित है।
चंद्रघंटा
तृतीया को देवी चंद्रघंटा की आराधना होगी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जगत जननी जगदंबा का तीसरा रूप चंद्रघंटा के नाम से प्रसिद्ध है। देवासुर संग्राम के दौरान माता चंद्रघंटा ने अपने घंटे से ही असुरों का दमन किया था। चंद्रमा शीतलता, शांति और घंटा नाद का प्रतीक है। घंटे के नाद से आसुरी शक्तियों से भक्तों की रक्षा करने वाली देवी चंद्रघंटा भगवान शिव की ही शक्ति हैं। वाराणसी में इनका मंदिर चौक के पास ठठेरी गली से होकर चंद्रघंटा गली में है।
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मां दुर्गा
चतुर्थ कूष्मांडा
ब्रह्मांड की रचना करने वाली देवी भगवती का चतुर्थ रूप कूष्मांडा का है। भक्तों को भूख से व्याकुल देख मां ने शाकंभरी नाम से धरती पर शाक पल्लवित किया। यह उदर की देवी हैं और प्रकृति तथा पर्यावरण की अधिष्ठात्री हैं। मां कूष्मांडा की तुष्टि और तृप्ति भी हैं। इनकी आराधना से भक्तों को सहज रूप से तृप्ति प्राप्त होती है। काशी में इनका मंदिर दुर्गाकुंड पर दुर्गा मंदिर के नाम से जाना जाता है।
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मां दुर्गा
- फोटो : अमर उजाला
पंचम स्कंदमाता
शारदीय नवरात्र की पंचमी तिथि को देवी भगवती के पांचवें स्वरूप स्कंदमाता की सविधि आराधना का विधान है। मां का पांचवां स्वरूप ममतामयी है। स्कंद कुमार की माता होने के कारण इनका नाम स्कंदमाता पड़ा। इनका विग्रह जैतपुरा मोहल्ले में स्थित बागेश्वरी मंदिर में है। पौराणिक मान्यता है कि एक बार ताड़कासुर ने तप करके ब्रह्मा जी से अक्षय जीवन का वचन ले लिया था।
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आगरा में नवरात्रि के मां के मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ी
- फोटो : self
षष्ठम कात्यायनी
कात्यायनी का ध्यान विशेष पुण्य फल दायी होता है। पुराणों के अनुसार देवताओं की कार्यसिद्धि के लिए देवी कात्यायनी ऋषि कात्यायन के आश्रम में अवतरित हुई थीं। कात्यायनी विश्वकारिणी शक्ति के रूप में भी विख्यात हैं। दिव्य रूप वाली इस देवी के दर्शन से भक्तों के हर बिगड़े काम बन जाते हैं। मां अपने भक्तों का अहित नहीं होने देती हैं। कात्यायनी देवी भगवती का विग्रह संकठा गली स्थित आत्म वीरेश्वर महादेव मंदिर परिसर में स्थित है।
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मां दुर्गा
सप्तम कालरात्रि
शारदीय नवरात्र की सप्तमी तिथि को महाविद्या धूमावती की आराधना का विधान है। सबको मारने वाली यानी काल की भी विनाशिका होने के कारण इनका नाम कालरात्रि पड़ा। इनका स्वरूप अत्यंत विकराल है। काशी में इनका मंदिर अन्नपूर्णा मंदिर के पीछे कालिका गली में है।
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आजाद नगर नईबाजार में जय मां विंध्यवासिनी दुर्गा पूजा समिति की ओर से पंडाल में स्थापित मां दुर्गा प्रतिमा।
अष्टम महागौरी
आठवें दिन इनकी आराधना से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। महागौरी के सभी वस्त्र और आभूषण श्वेत हैं। इनकी आराधना से शांति की प्राप्ति होती है। भगवान शिव का वरण करने के लिए भगवती महागौरी ने भीषण तपस्या की थी। इसी वजह से वह महागौरी कही गईं। काशी में महागौरी विश्वनाथ मंदिर के निकट अन्नपूर्णा के रूप में प्रतिष्ठापित हैं।
नवम सिद्धिदात्री
शारदीय नवरात्र के आखिरी दिन मनोवांछित मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाली मां सिद्धिदात्री के दर्शन का विधान है। दुर्गा की नौवीं शक्ति के रूप में सिद्धिदात्री को जाना जाता है। माता के नाम से काशी में एक गली का नाम प्रसिद्ध है। गोलघर स्थित सिद्धिमाता गली में इनका मंदिर है।