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Magh Maas 2022: पौष पूर्णिमा स्नान के साथ मास पर्यंत अनुष्ठान शुरू, जानें इस पवित्र महीने का महत्व

Mon, 17 Jan 2022 12:19 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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बनारस में गंगा स्नान - फोटो : अमर उजाला
पौष पूर्णिमा पर सोमवार को पुण्य की डुबकी के साथ माघ पर्यंत स्नान-दान समेत अन्य अनुष्ठान का आरंभ हो गाया।  माघ मास में ब्रह्म मुहूर्त में जागकर गंगा, नर्मदा, यमुना में स्नान करने से पापों का क्षय होता है। इस माह में दान-पुण्य, रोगियों, निशक्तों की सेवा करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं।

स्नान, दान कर पुण्य अर्जित करने के लिए माघ का महीना बहुत ही उत्तम माना गया है। मोक्ष प्रदान करने वाला माघ स्नान, पौष पूर्णिमा से आरंभ होकर माघ पूर्णिमा को समाप्त होता है। काशी विद्वत कर्मकांड परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आचार्य अशोक द्विवेदी ने बताया कि माघ मास की महिमा बताई। 

कहा कि इसमें जहां कहीं भी जल हो वह गंगाजल के समान ही होता है, फिर भी प्रयाग, कुरुक्षेत्र, हरिद्वार, काशी, नासिक, उज्जैन तथा अन्य पवित्र तीर्थों और नदियों में स्नान का बड़ा महत्व है।  माघ स्नान करने वाले मनुष्यों पर भगवान विष्णु प्रसन्न रहते हैं तथा उन्हें सुख-सौभाग्य, धन-संतान और मोक्ष प्रदान करते हैं।
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बनारस में गंगा स्नान - फोटो : अमर उजाला
माघ का स्नान पौष शुक्ल पूर्णिमा 17 जनवरी प्रारंभ होकर माघ शुक्ल पूर्णिमा 16 फरवरी को पूर्ण होगा। माघ का पूरा माह पवित्र नदियों में स्नान, दान, पुण्य के लिए शुभ होता है। 
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- फोटो : अमर उजाला
तुलसीदास जी ने श्री रामचरित्र मानस के बालकांड में लिखा है कि माघ मकर गति रवि जब होई, तीरथपतिहिं आव सब कोई !! अर्थात माघ मास में जब सूर्य मकर राशि में आते हैं तब सब लोग तीर्थों के राजा प्रयाग के पावन संगम तट पर आते हैं।

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- फोटो : varanasi makar sankranti
ज्योतिषाचार्य दैवज्ञ कृष्ण शास्त्री ने बताया कि सभी मनुष्यों के लिए पवित्र नदियों के तट पर जाकर स्नान करना संभव नहीं है और कोरोना संक्रमण काल भी चल रहा है। इसलिए अपने घर में ही पवित्र नदियों के स्नान का पुण्य प्राप्त किया जा सकता है। ब्रह्म मुहूर्त में जागकर पवित्र नदियों का जल (गंगाजल लगभग सभी घरों में होता है) डालकर उससे स्नान करें।
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गंगा स्नान करते श्रद्धालु। - फोटो : अमर उजाला।
माघ माह के दौरान कृष्ण पक्ष में संकट चौथ (गणेश चतुर्थी व्रत) षटतिला एकादशी, मौनी अमावस्या आती है तो शुक्ल पक्ष में वरदतिलकुन्द-विनायक चतुर्थी, वसंत पंचमी, शीतला षष्ठी, रथ-अचला सप्तमी, जया एकादशी व्रत और माघी पूर्णिमा जैसे पर्व आते हैं। मकर संक्रांति से ही देवों के दिन शुरू होते हैं, उत्तरायण शुरू होता है।
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पौष पूर्णिमा - फोटो : अमर उजाला
पौष पूर्णिमा 16 जनवरी को अर्द्धरात्रि के बाद 3:19 बजे लगेगी जो 18 जनवरी को भोर में 5:18 बजे तक रहेगी। स्नान-दान व्रत की पूर्णिमा इसी दिन मनाई जाएगी। पूर्णिमा तिथि चंद्रमा को समर्पित है, जिनकी चंद्रमा की महादशा, अंतर्दशा, प्रत्यंतर्दशा विपरीत हो, उन्हें पूर्णिमा तिथि पर व्रत-उपवास रखकर चंद्रमा की विशेष पूजा-अर्चना करनी चाहिए।
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पौष पूर्णिमा पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़। - फोटो : फाइल
ज्योतिषविद् विमल जैन के अनुसार इस दिन चंद्रमा की विधि-विधानपूर्वक पूजा-अर्चना करने पर अभीष्ट की प्राप्ति बताई गई है। पौष पूर्णिमा पर स्नान-दान से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी दिन से कल्पवास की शुरुआत हो जाती है।
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पूजा विधि - फोटो : अमर उजाला
शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन सत्यनारायण कथा कराने से हजारों साल तक किए गए यज्ञ के बराबर फल मिलता है।
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