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जानें कैसे रईस सिद्दीकी बन गया कुख्यात रईस बनारसी, मुन्ना बजरंगी से भी रहे हैं संबंध

Sun, 16 Sep 2018 12:51 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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rais banarasi - फोटो : amar ujala
रईस बनारसी अक्टूबर 2015 में जिला जेल से पेशी के लिए बरेली ले जाए जाने के दौरान शाहजहांपुर में पुलिस वैन से कूद कर फरार हो गया था। इसके बाद बनारस सहित इलाहाबाद और कानपुर में हत्या, लूट और रंगदारी के कई मामलों में रईस का नाम सामने आया। आगे की स्लाइड्स में देखें...
 

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रईस बनारसी - फोटो : amar ujala
कानपुर में नवंबर 2011 में रईस बनारसी ने अपने भाई के हत्यारे शानू ओलांगा की हत्या गुड्डू मामा और एक अन्य बदमाश के साथ मिलकर की थी। इस सनसनीखेज हत्याकांड के बाद गुड्डू मामा की मदद से रईस का नाम कानपुर से बनारस तक के कुख्यात बदमाशों में शुमार हो गया। 
 

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rais banarasi - फोटो : amar ujala
जरायम की दुनिया में कदम रखने के बाद रईस को सपोर्ट की जरुरत थी। उसने मुन्ना बजंरगी से संपर्क किया और उसके साथ काम शुरू किया। कुछ समय बाद उसने अपना गैंग बना लिया। इसके बाद कई बड़ी वारदातों को अंजाम दिया।
 

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rais banarasi - फोटो : amar ujala
रईस बनारसी कानपुर के अनवरगंज के हीरामन का पुरवा से जरायम की दुनिया में कदम रखा। रईस ने ज्यादातर आपराधिक घटनाओं को बनारस में अंजाम दिया। इसके बाद उसने लूट व हत्या के साथ मुंगेर (बिहार) से असलहों की तस्करी शुरू कर दी। बनारस में रहने के कारण ही रईस अहमद का नाम रईस बनारसी पड़ गया। रईस की गिनती उन खूंखार बदमाशों में होती थी जो लूट, रंगदारी के लिए जान लेने से नहीं हिचकते थे।
 

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rais banarasi - फोटो : amar ujala
रईस पुलिस की वर्दी में असलहों की तस्करी करने और लूट के लिए भी जरायम जगत में हनक करता था। रईस ने बनारस में 2007 में मलदहिया क्षेत्र में पेट्रोल पंप संचालक की हत्या कर लूटपाट की थी। पकड़ा गया तो पता लगा कि वारदात को उसने पुलिस की वर्दी पहन कर अंजाम दिया था। 
 
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rais banarasi - फोटो : amar ujala
इसके बाद 2010 और 2011 में जैतपुरा, आदमपुर, भेलूपुर, चेतगंज, सिगरा, कोतवाली और कानपुर में रईस का नाम हत्या, लूट और डकैती के डेढ़ दर्जन मामलों में सामने आया। रईस कानपुर की कुख्यात डी-2 गैंग की तरह पूर्वांचल में अपना गैंग बनाना चाहता था और काफी हद तक इसमें सफल भी रहा।
 

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rais banarasi - फोटो : amar ujala
मुखबिरों से रईस नफरत करता था और इसी वजह से उसने अपने साथी दीपू वर्मा की हत्या कर दी थी। नवंबर, 2015 में रईस का नाम भाजपा पार्षद शिव सेठ की हत्या में भी सामने आया था। इन दिनों वह खालिसपुरा, लोहता, मिर्जापुर और इलाहाबाद के नैनी में रह रहा था। सपा सरकार में पूर्वांचल के एक विधायक को रईस का सरपरस्त बताया जाता था।
 
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rais banarasi - फोटो : amar ujala
रईस पर बनारस और कानपुर में एक दर्जन से ज्यादा मुकदमें हैं। इनमे कोतवाली, सिगरा, भेलूपुर, जैतपुरा, आदमपुर थाना में हत्या, लूट, हत्या के प्रयास आदि के मुकदमे हैं। 
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