अखंड सौभाग्य और सुहाग की मंगलकामना के लिए रविवार को दिनभर निर्जला व्रत रही सुहागिनों ने करवाचौथ का व्रत पूजन किया। रात करीब आठ बजकर नौ मिनट पर चांद दिखने पर व्रती महिलाओं ने अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया। शाम से ही पूजन की तैयारियों में जुटी महिलाओं ने परंपरागत रूप से चलनी से उगते चांद को देखकर और लोक मान्यताओं के अनुसार व्रत पूरा किया।
चांद के इंतजार में परिवार के बच्चों ने बड़ों के साथ मिलकर मिनी दीपावली छतों पर ही मनाई। ज्योतिषीय गणना के अनुसार भले ही रात 8.09 बजे चंद्रोदय हुआ, लेकिन चौथ का चांद होने के कारण दिखने में 30 से 35 मिनट का समय लगा।
चांद को अर्घ्य देने के लिए महिलाएं परिवार के साथ आठ बजे के पहली ही छतों पर जमा होकर भजन कीर्तन और फोटा खिंचवाने में लगी रहीं। चांद के इंतजार के बीच महिलाओं ने चौथ माई की कथा सुनी और मिठाई आदि का भोग लगाकर करवा फेरने का रस्म निभाया।