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राज्यपाल आनंदी बेन पहुंची बाबा दरबार, दर्शन-पूजन के बाद देखा निर्माणाधीन विश्वनाथ धाम

Tue, 11 Feb 2020 04:53 PM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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काशी विश्वनाथ का अलौकिक श्रृंगार - फोटो : अमर उजाला।

सोमवार को ही वाराणसी के दौरे पर ही आईं राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का काफिला शाम को ज्ञानवापी होते हुए कंट्रोल रूम के पास पहुंचा।  शिखर को नमन करने के बाद उन्होंने बाबा विश्वनाथ मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश किया।



 

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निर्माणाधीन काशी विश्वनाथ कॉरीडोर के कार्यों का जायजा लेतीं राज्यपाल - फोटो : अमर उजाला

मंदिर के अर्चक श्रीकांत मिश्र ने  षोडषोपचार  दर्शन-पूजन कराया। दर्शन के बाद उन्होंने रक्षा सूत्र बंधवाया। फिर मंदिर के तरफ से अपर मुख्य कार्यपालक निखिलेश  मिश्रा ने अंगवस्त्रम व प्रसाद भेंट किया। रानी भवानी द्वार से बाहर आते समय निर्माणाधीन विश्वनाथ धाम के कार्यों को देखने हेतु आगे बढ़ीं, चल रहे कार्यों को देखा और विस्तृत जानकारी ली और उसके बाद गंतव्य के लिए निकल गईं। 

 

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पूजा करतीं राज्यपाल - फोटो : अमर उजाला

इससे पहले सुबह के समय राज्यपाल सालों से पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र तथागत की धर्म उपदेश स्थली सारनाथ पहुंची। यहां के पुरातात्विक अवशेषों और अन्य स्थलों का आकर्षण से राज्यपाल भी मोहित सी हो गईं। सुबह लगभग 10:30 बजे महामहिम ने सारनाथ पहुंचकर पुरातात्विक खंडहर परिसर का अवलोकन किया।

इस दौरान अति प्राचीन धमेख स्तूप की नक्काशियों से इतनी प्रभावित हुईं कि एकटक निहारते हुए स्तूप की परिक्रमा की। राज्यपाल का स्वागत भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीक्षक पुरातत्व विद नीरज सिन्हा ने बुके दे कर किया। उनको लकड़ी से निर्मित अशोक स्तंभ स्मृति चिन्ह के रूप में महाबोधी सोसायटी आफ इंडिया के संयुक्त सचिव ने भेंट किया। भिक्षु के मेधांकर थेरो ने बताया कि राज्यपाल के स्वस्थ व दीर्घायु होने के लिए पाली भाषा में मंत्र उच्चारण किया गया।

 

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विजिटर बुक में हस्ताक्षर करतीं राज्यपाल - फोटो : अमर उजाला

पुरातात्विक खंडहर परिसर में नवनिर्मित वात्सल्य कक्ष, अमानती सामान कक्ष का फीता काटकर उद्घाटन किया। पास खड़े अधीक्षण पुरातत्व विद नीरज सिन्हा ने उनसे वहां बच्चों के खेलने के लिए कुछ व्यवस्था की मांग की। उद्घाटन करने के पश्चात राज्यपाल ने पुरातात्विक खंडहर परिसर में स्थित अशोक स्तंभ के अवशेषों व प्राचीन मूलगंध कुटी बिहार मंदिर देखा। अधीक्षण पुरातत्व विद नीरज सिन्हा ने 1880 से लेकर 2017 तक के उत्खनन के तुलनात्मक फोटोग्राफ्स दिखाएं। वीआईपी गेट से श्रीलंका के मूलगंध कुटी मंदिर लिए गई।

जहां पर स्वागत व अभिनंदन महाबोधी सोसायटी आफ इंडिया के संयुक्त सचिव के मेधांकर थेरो ने खाता पहनाकर किया। मंदिर में अपने बहन और बहनोई संग भिक्षु के मेधांकर थेरो ने पाली भाषा में धम्मसूत्त पाठ कर कलाई में रक्षा सूत्र बांधे। मंदिर में धूपबत्ती वह मोमबत्ती जलाकर पूजा पाठ संपन्न की। विजिटर बुक में अपने अनुभव को लिखा। प्रांगण में ही स्थित बोधि वृक्ष का दर्शन कर परिक्रमा कर राज्यपाल लगभग 11:30 बजे सर्किट हाउस के लिए सारनाथ से रवाना हो गईं।

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सफाई करते ठेला व्यवसायी - फोटो : अमर उजाला
राज्यपाल के आने से पहले फेरी पटरी ठेला व्यवसायी समिति के सदस्यों ने पूरे सारनाथ क्षेत्र को पानी छिड़कर झाड़ू लगाकर साफ-सुथरा किया। जो क्षेत्र में हमेशा चर्चा का विषय रहता है। सारनाथ के फेरी पटरी ठेला व्यवसाई पूरे क्षेत्र की सफाई का कमान अपने हाथों में लिए रहते हैं। प्रत्येक दिन सुबह-शाम पानी का छिड़काव कर म्यूजियम से लेकर मुख्य चौराहे तक झाड़ू लगाकर क्षेत्र को साफ किए रहते हैं।
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