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वाराणसी: गंगा में प्रवाह कम होने से पानी का रंग बदला, नमामि गंगे ने एनएमसीजी से लगाई गुहार

Thu, 27 May 2021 12:48 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी

सार

वाराणसी में उत्तरवाहिनी गंगा में अभी तक नालों का ही गंदा पानी समा रहा था, अब तो उसमें काई भी जमने लगी है। यहां कई घाटों पर बड़े भाग में गंगा का पानी हरा हो गया है। कई घाटों पर तो स्थिति यह है कि गंगा के जल से बदबू उठने लगी है।
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गंगा का पानी हरा - फोटो : Twitter
वाराणसी में उत्तरवाहिनी गंगा में अभी तक नालों का ही गंदा पानी समा रहा था, अब तो उसमें काई भी जमने लगी है। यहां कई घाटों पर बड़े भाग में गंगा का पानी हरा हो गया है। कई घाटों पर तो स्थिति यह है कि गंगा के जल से बदबू उठने लगी है। घाट छोड़ती गंगा और चारों तरफ फैले सिल्ट को देखकर गंगा के प्रेमी, घाट के निवासी और गंगा के जानकार यही कह रहे हैं कि अगर गंगा को अविरल न किया गया तो इसके अस्तित्व पर ही खतरा है।

प्रख्यात नदी विज्ञानी प्रो. बीडी त्रिपाठी ने कहा कि गंगा के घाटों का छोड़ना और पानी में शैवाल का मिलना इस बात का प्रमाण है कि गंगा में प्रवाह बेहद कम हो गया है। इससे आक्सीजन का स्तर कम होगा और जलीय जीवों के लिए संकट खड़ा हो जाएगा। गंगा में प्रवाह कम होने के पीछे गंगा पर बनने वाले बांध, लिफ्ट कैनाल और भूजल रिचार्ज के लिए पानी का जमीन के अंदर जाना है।

बिना अविरलता के गंगा की निर्मलता नहीं हो सकती है। इधर, वैशाख पूर्णिमा पर नमामि गंगे ने एक बार फिर गंगा की अविरलता का आह्वान किया। इसके साथ ही गंगा घाट पर गंगा की सफाई के साथ ही आम जनता को कोरोना महामारी में मास्क के लिए जागरूक किया गया।
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नमामि गंगे ने की सफाई, - फोटो : अमर उजाला
गंगा की निर्मलता के लिए अविरलता जरूरी है। वैशाख पूर्णिमा पर नमामि गंगे ने एक बार फिर गंगा की अविरलता का आह्वान किया। इसके साथ ही गंगा घाट पर गंगा की सफाई के साथ ही आम जनता को कोरोना महामारी में मास्क के लिए जागरूक किया गया। बुधवार को नमामि गंगे के सदस्यों ने दशाश्वमेध घाट पर गंगा में तलहटी की सफाई की। 
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गंगा में जम रही काई, नमामि गंगे ने की सफाई - फोटो : अमर उजाला
नमामि गंगे  संयोजक राजेश शुक्ला ने विगत चार दिनों से अस्सी से राजघाट तक गंगा में फैली काई का हवाला देते हुए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन से अपील की है कि गंगा के प्रवाह को निरंतर बनाए रखा जाए। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन को व्हाट्स एप व ईमेल के माध्यम से गुहार लगाई गई है।

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काशी में गंगा अब घाटों को छोड़ने लगी हैं। - फोटो : अमर उजाला
 काशी में गंगा अब घाटों को छोड़ने लगी हैं। हालत यह हो गई है कि अस्सी से आदिकेशव घाट के बीच में जगह-जगह रेत के टीले नजर आने लगे हैं। गंगा में प्रवाह कम होने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है।
बनारस के घाटों में मई के अंतिम सप्ताह में गंगा का जलस्तर लगातार कम हो रहा है। हालात यह है कि पिछले 15 दिनों में जलस्तर में दो से ढाई फीट की कमी दर्ज की गई है। 
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काशी में गंगा अब घाटों को छोड़ने लगी हैं - फोटो : अमर उजाला
बनारस के सभी घाटों का अगर जायजा ले तो गंगा घाट की सीढ़ियों से दूर जाने की भयावह स्थिति अस्सी घाट से दिखनी शुरू हो जाती है। यहां गंगा सीढ़ियों से करीब 65 फीट दूर बह रही हैं। गंगा घाट पर आने वाले यकीन ही नहीं कर पा रहे कि जहां कुछ दिन पहले गंगा की लहर नजर आती थी, आज उस जगह सिल्ट है। मौजूदा हालत यह है कि कहीं 30 तो कहीं 65 फीट तक घाटों से गंगा दूर हो गई हैं।
 
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गंगा प्रदूषण की ये हालत
गंगा के घाट छोड़ने के कारण उसमें लहरें भी बहुत कम हो गई हैं। कई घाटों पर तो स्थिति यह है कि गंगा के जल से बदबू उठने लगी है। घाट छोड़ती गंगा और चारों तरफ फैले सिल्ट को देखकर गंगा के प्रेमी, घाट के निवासी और गंगा के जानकार यही कह रहे हैं कि अगर गंगा को अविरल न किया गया तो इसके अस्तित्व पर ही खतरा है।
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