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एक महीने से परिवार कर रहा था आत्मदाह की तैयारी, पत्नी से लिखवाया था सुसाइड नोट

Fri, 14 Feb 2020 09:17 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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पूरे परिवार ने की सुसाइड। - फोटो : अमर उजाला।
वाराणसी के मुकीमगंज क्षेत्र के नचनीकुआं मुहल्ला निवासी कारोबारी चेतन तुलस्यान बीते एक महीने से पत्नी और बच्चों के साथ जान देने की तैयारी कर रहा था। इसके लिए घर में नायलान की रस्सी और टेप लाकर रखा था। पहले पत्नी और फिर दोनों बच्चों को समझाया। उसके बाद बीते 22 जनवरी को चेतन ने स्टैंप युक्त शपथ पत्र बनवाकर उसका लेमिनेशन कराया। शपथ पत्र में लिखा है कि उसकी मौत के बाद उसके हिस्से की संपत्ति गोरखपुर निवासी साले श्रीराम खेमका को दे दी जाए। श्रीराम खराब समय में भी लगातार आर्थिक मदद करते रहे।
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चेतन को आंखों से कम दिखाई देने के कारण पेन और स्केच से सुसाइड नोट ऋतु ने लिखा था। फोरेंसिक टीम के अनुसार, सुसाइड नोट इत्मीनान से और अलग-अलग दिनों में लिखा गया है। सुसाइड नोट में लिखा है कि आंखों से कम दिखाई देने के कारण अपने मन की बातें ऋतु से लिखवा रहा हूं। आखिर में चेतन ने खुद दस्तखत किया था।
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ऋतु ने लिखा कि तकरीबन 20 साल पहले शादी कर बनारस आई तो परिवार जितना खुशहाल बाहर से दिखता था, अंदर से वैसा नहीं था। बनारस में कभी भी खुश नहीं रह सकी। शादी के बाद पता लगा कि पति आंखों की कम होती रोशनी की लाइलाज बीमारी से पीड़ित हैं। पति की बीमारी बढ़ने के साथ ही घर में उनकी स्थिति कमजोर होती चली गई और व्यापार में भी लगातार घाटा होने लगा। सास और ससुर ने कभी हमारी समस्याएं समझने की कोशिश नहीं की।

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कई बार अवसाद ग्रस्त होने पर लगा कि सास गले लगाकर बेटी के जैसे प्यार करेंगी और समझाएंगी, लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ। हर तरफ से उपेक्षा और असहयोग ही मिला। काले पंखे के कारोबार में भी पति की हैसियत मालिक की नहीं वर्कर जैसी थी। तमाम तरह की तकलीफों और परेशानियों की वजह से दुनिया छोड़ने का निर्णय ले रही हूं।
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बच्चों ने कहा था कि पापा नींद की गोली देकर गला दबा देना
सुसाइड नोट के अनुसार, पति और पत्नी ने जान देने की बात आपस में तय कर ली तो उन्होंने इस संबंध में बच्चों से भी बात की। हर्ष स्नातक की पढ़ाई कर रहा था और हिमांशी ने इंटरमीडिएट का प्राइवेट फार्म भरा था। दोनों बच्चों ने चेतन से कहा था कि हमें नींद की गोली देकर पापा गला दबा देना। बच्चों ने जैसा कहा वैसा ही उनके साथ चेतन ने किया। उधर, चेतन के हाथ पीछे की ओर ढीलेढाले टेप से बंधे थे।
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पुलिस के अनुसार, चेतन ने ऐसा इसलिए किया था ताकि फंदे पर लटकने के बाद विचार बदले तो वह खुद को बचाने का प्रयास न कर सके। चेतन की पत्नी के दोनों हाथों में भी टेप लगा हुआ था और वह भी ढीलाढाला सा था।
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महीने में 18 हजार रुपये थी चेतन की आय
सुसाइड नोट के अनुसार, जालीदार काले पंखे असेंबल करने का आर्डर मिलता था और काम होता था तो चेतन को प्रतिमाह पांच हजार रुपये मिलते थे। इसके अलावा बुलानाला में उसकी दुकान है, जिसका किराया प्रति माह 26 हजार रुपये आता है। इसमें से 13 हजार रवींद्र और 13 हजार चेतन लेता था। मुहल्ले के लोगों ने कहा कि ऐसा भी नहीं था कि परिवार गंभीर आर्थिक तंगी का शिकार था। अपना मकान है और 13 हजार रुपये महीने में मिलना तय ही था। इतने में आसानी से परिवार का पालन पोषण संभव था।

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फोन न उठने से पुलिस को आधा घंटा लगा घर खोजने में
चेतन ने 4:35 बजे सौ नंबर पर कॉल कर कहा कि दोनों बच्चे खत्म हो गए हैं और अब मैं जान देने जा रहा हूं। इस सूचना पर पीआरवी और सिटी कंट्रोल रूम के पुलिसकर्मियों में हड़कंप मच गया। जिस मोबाइल नंबर से फोन आया था, उसकी जीपीएस लोकेशन की मदद से पुलिस पहुंची और कॉल करने लगी तो रिसीव ही नहीं हो रही थी। ट्रू कॉलर से नंबर चेक किया गया तो उस पर हिमांशी लिख कर आया।
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सुबह में मुहल्ले के लोगों से हिमांशी के बारे में पूछने पर कोई कुछ बता नहीं सका। पुलिसकर्मियों ने नंबर को मोबाइल में सेव कर व्हाट्सएप पर उसे चेक किया तो रवींद्र नाथ की फोटो आई। पुलिस कर्मियों ने रवींद्र नाथ की फोटो दिखाकर उनके बारे में पूछना शुरू किया तो मुहल्ले का एक युवक उन्हें उनके घर तक ले गया।
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