2005 में हुई इस हेराफेरी की जानकारी रामअवतार को 2012 में पता चली। मोहम्मदपुर गांव के राजेंद्र, इंद्रजीत और दुलारी देवी ने 12 फरवरी 2012 को गांव के ही सितमी देवी, मंजू देवी, सुमन और कांति के नाम रामअवतार की जमीन जायदाद को बैनामा कर दिया। इसके बाद रामअवतार ने मृतक संघ के बैनर तले खुद को जीवित करने के लिए संघर्ष शुरू किया। 12 नवंबर 2013 को सरकारी रिकॉर्ड में रामअवतार जीवित कर दिए गए और खतौनी में इनका नाम चढ़ गया।